सम्पादकीय एवं विश्लेषण
विलंब के कारण न्याय से वंचित: न्यायालयों में अनसुलझे मामलों की बढ़ती हुई संख्या
भारतीय न्यायालयों में अनसुलझे मामलों का मुद्दा एक बड़ी चुनौती है, जिसने न्याय प्रणाली को गहराई से प्रभावित किया है। लंबित मामलों की बढ़ती संख्या न्याय प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गई वर्तमान प्रणाली की प्रभावशीलता और दक्षता पर गंभीर सवाल उठाती ...
By दैनिक हाक
सम्पादकीय एवं विश्लेषण
पच्चास साल बाद होने वाली परिसीमन को लेकर चिंताएँ
राजकोषीय संघवाद और संस्थागत ढांचे को मज़बूत करके, हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि राजनीतिक निष्पक्षता जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के साथ मिलीजुली हो, जिससे एक सुसंगत और एकजुट भारत को बढ़ावा मिले। लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से नागरिकों को बेहतर प्रतिनिधित्व मिलेगा, जिससे निर्वाचन क्षेत्रों का आकार छोटा होगा और शासन में सुधार होगा। ...
By दैनिक हाक
सम्पादकीय एवं विश्लेषण
शांति की बहाली की ओर बढ़ता मणिपुर
देश का सीमावर्ती राज्य मणिपुर दो वर्षों से हिंसाग्रस्त है। इस राज्य की हिंसा को रोकने की दिशा में जो भी कोशिशें की गईं वे अभी तक तो नाकाम साबित होती आ रही हैं। जातिगत हिंसा के शिकार मणिपुर में मैंतेयी और कुकी समुदाय के बीच दो वर्षों से हो रही हिंसा की वजह से ही पूरा मणिपुर राज्य हिंसाग्रस्त बना हुआ ...
By दैनिक हाक
सम्पादकीय एवं विश्लेषण
महाराष्ट्र: दोराहे पर खड़ी शिवसेना, विभाजन के बाद भी नहीं बदले हैं हालात
...
By दैनिक हाक
सम्पादकीय एवं विश्लेषण
महाराष्ट्रः 100 दिन की सरकार, 700 निर्णय
देश के दूसरे सबसे बड़े राज्य महाराष्ट्र की सरकार ने 8 अक्टूबर को अपनी स्थापना के 100 दिन पूरे कर लिए। मंत्रिमंडल के लिहाज भले ही राज्य की मौजूदा एकनाथ शिंदे सरकार बहुत छोटी हो, लेकिन जहां तक निर्णय लेने का मामला है, यह सरकार बहुत आगे है। ...
By दैनिक हाक