लेखक--सच्चिदानंद शेकटकर देश का सीमावर्ती राज्य मणिपुर दो वर्षों से हिंसाग्रस्त है। इस राज्य की हिंसा को रोकने की दिशा में जो भी कोशिशें की गईं वे अभी तक तो नाकाम साबित होती आ रही हैं। जातिगत हिंसा के शिकार मणिपुर में मैंतेयी और कुकी समुदाय के बीच दो वर्षों से हो रही हिंसा की वजह से ही पूरा मणिपुर राज्य हिंसाग्रस्त बना हुआ है। हिंसा का आलम यह है कि दोनों समुदाय के लोग आज भी एक दूसरे के क्षेत्र में आ-जा नहीं सकते हैं और यदि कोई धोखे से चला भी गया तो उसके प्राण भी जा सकते हैं। दोनों ही समुदायों के बीच तनाव और कटुता इस कदर बढ़ी हुई है कि दोनों ही समुदायों ने मणिपुर में अवैध रूप से बैरिकेट लगाकर रखे हैं और वहां हर गाड़ी की चेकिंग की जाती है। एक समुदाय के लोगों का बेरीकेटिंग वाले इलाके से गुजरना दूसरे समुदाय के लिए बेहद खतरनाक होता है। इन अवैध बेरीकेट्स पर अवैध रूप से वसूली का कारोबार भी जमकर चल रहा है। इन बैरिकेट्स से गुजरने वाली हर गाड़ी से बलपूर्वक वसूली भी की जाती है। इस जटिल समस्या को हल करने की दिशा में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सुरक्षा बलों को यह निर्देश दिए हैं कि वह 8 मार्च से राज्य के सभी मार्गों पर लोगों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करें और आवाजाही में जो लोग बाधा उत्पन्न करते हैं उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाना चाहिए। मणिपुर में सभी रास्तों से अवैध बेरीकेट्स हटाकर मुक्त आवाजाही सुनिश्चित करने और जबरन वसूली करने वालों के खिलाफ कठोर कार्यवाही करने के निर्देश भी गृहमंत्री द्वारा दिए गए हैं। इसके साथ ही मणिपुर में ड्रग्स तस्करों के नेटवर्क के खिलाफ भी अभियान शुरू करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। वहीं मणिपुर में म्यांमार से घुसपैठ रोकने के लिए प्राथमिकता के आधार पर सीमा पर बाड़ लगाने की कार्यवाही करने के लिए भी निर्देश दिए गए हैं। गृह मंत्री अमित शाह का यह साफ मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की सरकार मणिपुर में सिर्फ स्थाई शांति बहाली के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए हर संभव सहायता भी दी जा रही है। अब 8 मार्च से मणिपुर के सभी रास्तों पर लोगों की मुक्त आवाजाही सुनिश्चित की जाने की तैयारी की जा रही है ताकि लोग अब कहीं भी आ जा सकें। मणिपुर में म्यांमार से कुकियों का अवैध घुसपैठ करना एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। इस अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए मणिपुर से लगी अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर आवाजाही के लिए चिन्हित किए गए प्रवेश स्थान के दोनों तरफ बाड़ लगाने के काम को भी जल्द ही पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। भारत सरकार का गृह मंत्रालय पहले ही म्यांमार के साथ 1967 में किए गए मुक्त आवाजाही समझौते को निरस्त कर चुका है। अब जब गृहमंत्री द्वारा 8 मार्च से पूरे राज्य में निर्बाध आवाजाही को सुनिश्चित करने की दिशा में निर्देश दिए जा चुके हैं तब यह उम्मीद की जा रही है कि अब हिंसाग्रस्त मणिपुर स्थाई शांति की ओर आगे बढ़ेगा।