सुधीर जोशी*
देश के दूसरे सबसे बड़े राज्य महाराष्ट्र की सरकार ने 8 अक्टूबर को अपनी स्थापना के 100 दिन पूरे कर लिए। मंत्रिमंडल के लिहाज भले ही राज्य की मौजूदा एकनाथ शिंदे सरकार बहुत छोटी हो, लेकिन जहां तक निर्णय लेने का मामला है, यह सरकार बहुत आगे है। 100 दिन में 700 निर्णय लेकर एकनाथ शिंदे तथा देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार ने यह बता दिया कि यह सरकार निर्णय लेने के मामले में राज्य की पूर्ववर्ती सरकारों की तुलना में बहुत आगे है।
100 दिन की सरकार के संदर्भ में अगर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से जुड़े विभागों के बारे में लिए गए निर्णय पर गौर किया जाए तो राज्य सरकार ने समृद्धि महामार्ग को गडचिरोली जिले तक बढ़ाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री एकानाथ शिंदे ने कुलाबा-बांद्रा-सीफ्ज इस मुंबई-मेट्रो मार्ग-03 के लिए 10 हजार करोड़ की वृद्धि को मंजूरी प्रदान की। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने राजधानी मुंबई को गड्ढों से मुक्ति दिलाने के लिए 5 हजार, 500 करोड़ की निधि मंजूर कराई। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री के विशेष प्रयासों से धारावी पुनर्विकास के लिए नए सिरे से निविदा मंगाई।
देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्रित्व काल में शुरु की गई नागपुर मेट्रो परियोजना जिसे महाविकास आघाड़ी की उद्धव ठाकरे के नेतृत्ववाली सरकार ने ब्रेक लगा दिया था, इस परियोजना के लिए 9279 करोड़ रुपए के नए सुधारित खर्च को हरी झंडी दिखायी। एकनाथ शिंदे ने एमएमआरडीए को विभिन्न परियोजनाओं को अमल में लाने के लिए60 हजार करोड़ तक का कर्ज लेने के लिए सरकार की ओर से स्वीकृति देने का निर्णय लिया गया।
राज्य की शिवसेना के बागी विधायकों तथा भाजपा के विधायकों की मदद से बनी सरकार में मुख्यमंत्री से संबंधित विभागों के अलावा अन्य विभागों की ओर से भी कई जनोपयोगी निर्णय लिए गए हैं। चूंकि एकनाथ शिंदे तथा उनसे साथ आए शिवसेना के बागी विधायकों के अलावा राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जो एकनाथ शिंदे की सरकार में उप मुख्यमंत्री की भूमिका निभा रहे हैं, ने भी 100 दिनों की सरकार में जनहितोंसे जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले किए हैं।
सरकार ने अपने 100 दिनों के शासनकाल में राशन कार्डधारकों को 100 रूपए किलो की दर से एक किलो सूजी, चना दाल, चीनी तथा एक लीटर पाम तेल देने का निर्णय लिया है। इसके अलावा शिंदे फडणवीस सरकार ने 14 लाख किसानों को 50 हजार रूपए का मदद भत्ता देने का ऐलान भी किया है। इसके अतिरिक्त राज्य के अकाल प्रभावित किसानों को 3 हेक्टर क्षेत्र में हुए नुकसान भरपाई देने की घोषणा की। इतना ही नहीं नियमो-शर्ताे में न आने वाले अतिवृष्टि प्रभावित किसानों को भी 755 करोड़ की मदद राशि देने संबंधी निर्णय इस सरकार ने लिया है। राज्य सरकार के 100 दिनों के कार्यकाल में शंखी गोगलगाई के कारण प्रभावित किसानों की मदद के लिए 18 करोड़ रूपए की आर्थिक मदद देने का ऐलान भी किया गया। देश के अन्य हिस्सों की तरह रसोई गैस पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को ध्यान में रखते हुए राज्य की एकनाथ शिंदे तथा देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने पेट्रोल की कीमतों में पांच रूपए तथा डीजल की कीमतों में तीन रूपए की कमी करने का ऐलान किया।
राज्य सरकार के 100 दिनों की सत्ता में जो अहम निर्णय लिए गए, उनमें पुलिस विभाग के 7231पदों पर नियुक्ति, विदर्भ-मराठवाडा तथा शेष महाराष्ट्र इन तीनों के विकास महामंडल का पुनगर्ठन करने का निर्णय, एमपीएससी के दायरे में आने वाले शत-प्रतिशत तथा दायरे के बाहर आने वाले 50 प्रतिशत पदों पर भर्ती करने का निर्णय लिया गया। इसके अतिरिक्त वर्ग-3 के रिक्त पदों को एमपीएससी के माध्यम से भरने जैसा महत्वपूर्ण निर्णय भी इस सरकार की ओर से किया गया है।
राज्य सरकार ने पुलिस विभाग का अवकाश को 12 की जगह 20 दिन कर दिया है। इस तरह देखा जाए तो एकनाथ शिंदे सरकार के शासनकाल के पहले 100 दिन जनहितों से जुड़े फैसलों के लिए जाने जाएंगे। 100 दिनों के अल्पकाल में 700 निर्णय करके राज्य की मौजूदा सरकार ने यह संदेश दिया है कि वह जनहितों से जुड़े कार्य करने में कोई गुरेज नहीं करेगी। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से वैचारिक मतभेदों के कारण अपना अलग गुट बनाकर भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने वाले एकनाथ शिंदे तथा देवेंद्र फडणवीस दोनों ने मिलकर जन हितों से जुड़े निर्णय करने में कोई गुरेज नहीं किया है। शिवसेना को छोड़कर अपना अलग गुट बनाने वाले एकनाथ शिंदे और शिवेसना के बीच असली- नकली शिवसेना को लेकर जारी जंग के बीच यह भी कहा जा रहा है कि एकनाथ शिंदे का पलड़ा भारी है।
निर्वाचन आयोग के समक्ष दोनों की ओर से अपना-अपना पक्ष रखा गया है, दोनों को उम्मीद है कि शिवसेना का चिन्ह उन्हें ही मिलेगा। दोनों की ओर से यह भी दावा किया जा रहा है कि उनकी दशहरा रैली में ज्यादा भीड़ उमड़ी है। सरकार ने 100 दिनों के अल्प काल में 700 निर्णय करके यह बता दिया है कि वह जनता से जुड़े फैसले करने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रही है। जिस तरह से असली-नकली शिवसेना तथा शिवसेना के चिन्ह को लेकर जंग चल रही है, उससे यह कहना गलत नहीं कि एकनाथ शिंदे के लिए आने वाला समय उतना आसान नहीं होगा, जितना वह मानकर चल रहे हैं। सिर्फ निर्णय लेना ही महत्वपूर्ण नहीं, उस पर अमल होना उससे भी ज्यादा जरूरी है।
अगर राज्य सरकार 100 दिन 700 निर्णय लेने में सफल रही है, तो इस लिहाज से उसे शेष कालावधि में बहुत से जनहितों से जुड़े निर्णय लेने होंगे। पहले मुंबई महानगरपालिका समेत कई अन्य महानगरपालिका, नगरपालिका, जिला परिषद, पंचायत समिति के चुनाव तथा उसके बाद राज्य विधानसभा चुनाव सभी में राज्य की मौजूदा सरकार के मुखिया एकनाथ शिंदे को अपना वर्चस्व दिखाना होगा, अगर इन चुनावों में शिंदे गुट ने देवेंद्र फडणवीस की तुलना में ज्यादा सफलता पाई तो एकनाथ शिंदे नायक के रूप में उभरेंगे और अगर फडणवीस शिंदे के मुकाबले बीस रहे तो एकनाथ शिंदे की उल्टी गिनती शुरु हो जाएगी।
शिंदे को अपनी सियासी यात्रा को मजबूत करने के लिए निर्णयों की सौगातों का सिलसिला जारी ही रखना होगा। घोषणाओं, फैसलों, निर्णयों की झड़ी लगाकर जनता के बीच खुद को सक्रिय बताने का अभियान जारी रखना होगा। सच तो यह है कि एकनाथ शिंदे को खुद को उद्धव ठाकरे तथा देवेंद्र फडणवीस से आगे रखना होगा। भले ही लोग शिंदे को ठाकरे के मुकाबले आगे ले जाने के लिए तत्पर दिखेंगे लेकिन वे कभी नहीं चाहेंगे कि एकनाथ शिंदे देवेंद्र फडणवीस से आगे निकल जाएं।
भाजपा के नेताओं ने शीर्षनेतृत्व के कहने पर भले ही एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री के रूप में वर्तमान में स्वीकार कर लिया हो लेकिन 2024 के विधानसभा चुनाव में राज्य में भाजपा का ही मुख्यमंत्री हो, इसके लिए भाजपा के स्थानीय नेताओं की ओर से कोहराम जरूर मचेगा, ऐसे में वर्तमान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे खुद को केवल घोषणा मंत्री के रूप में सामने न लाकर जनहितों के मुद्दों को अमल में लाकर पल-पल यह बताने की कोशिश करते रहेंगे कि मैं जन हितों को महत्व देने वाला नेता हूं।
यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि राज्य सरकार के अगले 100 दिन कैसे होंगे, इन 100 दिनों में राज्य सरकार की ओर से कितने निर्णय लिए जाएंगे। सरकार की ओर से लिए गए निर्णय जनता को कितने पसंद आएंगे, जनता की कसौटी पर सरकार कितनी सफल होगी, यह तो अभी भविष्य के गर्भ में है, लेकिन अगर बीते 100 दिनों की बात करें तो सरकार की ओर से लिए गए 700 निर्णय से जनता के बीच सरकार की छवि एक सक्रिय सरकार के रूप में ही सामने आई है, ऐसे में अगर शिंदे गुट को असली शिवसेना होने की मान्यता मिल गई तो यह सरकार और ज्यादा लोकप्रिय होकर उभरेगी।
—दैनिक हाक फीचर्स
*लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।