Monetary Policy : पश्चिम एशिया संकट के प्रति आरबीआई सतर्क, भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत: संजय मल्होत्रा

पश्चिम एशिया तनाव के बीच आरबीआई सतर्क, महंगाई और विकास पर नजर
पश्चिम एशिया संकट के प्रति आरबीआई सतर्क, भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत: संजय मल्होत्रा

नई दिल्ली: वैश्विक आर्थिक हालात और निवेशकों का भरोसा पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बाद कमजोर हुआ है, जिससे विकास और महंगाई के अनुमान पर असर पड़ा है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने गुरुवार को आरबीआई बुलेटिन में कहा कि केंद्रीय बैंक स्थिति पर सतर्क रहेगा और ऐसी नीतियां लागू करेगा जो अर्थव्यवस्था के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता दें।

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण मार्च में वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया, हालांकि अप्रैल के पहले हिस्से में कुछ राहत देखने को मिली।

संघर्ष शुरू होने से पहले भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में थी, जहां विकास दर अच्छी थी और महंगाई नियंत्रित थी।

मल्होत्रा ने वित्त वर्ष 2027 के पहले आरबीआई बुलेटिन में कहा, "मार्च में संघर्ष के तेज होने से परिस्थितियां प्रतिकूल हो गईं। लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था पहले के संकटों और कई अन्य देशों की तुलना में ज्यादा मजबूत है, जिससे यह झटकों को सहने में सक्षम है।"

वैश्विक स्तर पर विकास को खतरा बढ़ रहा है, क्योंकि ऊर्जा की कीमतें बढ़ी हैं और कई उद्योगों के लिए जरूरी कच्चे माल की कमी से महंगाई का दबाव बढ़ा है। इससे तेल बाजार में जोखिम भी बढ़ गया है।

उन्होंने कहा कि इस अनिश्चितता के कारण निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर जा रहे हैं, जिससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है और अन्य देशों की मुद्राओं पर दबाव पड़ा है। धातु और सोने की कीमतों में कुछ कमी आई है, लेकिन वित्तीय बाजार ज्यादा अस्थिर हो गए हैं।

इस बीच, शेयर बाजार में भी गिरावट देखी गई है और सरकारी बॉन्ड यील्ड भी बढ़ी है, जो पहले से ही महंगाई और वित्तीय चिंताओं के कारण ऊंचे स्तर पर थी।

वहीं, भारत में कई क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं, हालांकि कुछ सेक्टर में थोड़ी धीमी गति देखी गई है।

उन्होंने कहा कि मार्च में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) महंगाई में थोड़ा इजाफा हुआ, जो ईंधन और खाद्य कीमतों के कारण था। पश्चिम एशिया में अस्थायी युद्धविराम के बाद मनी मार्केट और बॉन्ड यील्ड में थोड़ी राहत मिली।

आयात में कमी और निर्यात में बढ़ोतरी के कारण व्यापार घाटा नौ महीने के सबसे निचले स्तर पर आ गया। विदेशी निवेश (एफपीआई) में उतार-चढ़ाव रहा, जबकि फरवरी में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) सकारात्मक रहा।

मल्होत्रा ने कहा कि अगर सप्लाई चेन जल्द ठीक नहीं हुई, तो शुरुआती सप्लाई झटका आगे चलकर मांग पर भी असर डाल सकता है।

--आईएएनएस

 

 

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