नई दिल्ली: हल्दी भारतीय रसोई का एक ऐसा हिस्सा है, जिसे हम रोजमर्रा के खाने में बिना सोचे-समझे इस्तेमाल करते हैं। लेकिन अब विज्ञान भी इस साधारण दिखने वाली चीज में छिपी खासियतों को गंभीरता से समझने लगा है। हाल ही में सामने आए एक शोध ने हल्दी के प्रमुख तत्व करक्यूमिन को लेकर नई उम्मीदें जगाई हैं। खासकर डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए।
करक्यूमिन वही प्राकृतिक तत्व है, जो हल्दी को उसका पीला रंग देता है। लंबे समय से इसे सूजन कम करने और शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों से बचाने के लिए जाना जाता रहा है। यही वजह है कि आयुर्वेद से लेकर आधुनिक शोध तक, दोनों में इसकी चर्चा होती रही है। अब एक नए अध्ययन में यह संकेत मिला है कि करक्यूमिन दिल और खून की नसों को भी सुरक्षित रखने में मदद कर सकता है। खासकर उन लोगों में, जिन्हें टाइप 1 डायबिटीज़ है।
टाइप 1 डायबिटीज़ में शरीर खुद इंसुलिन बनाना बंद कर देता है। इससे खून में शुगर का स्तर बढ़ जाता है और धीरे-धीरे शरीर के कई हिस्सों पर असर पड़ता है। दिल और धमनियां भी इससे अछूती नहीं रहतीं। समस्या यह है कि कई बार इंसुलिन लेने के बाद भी इन रक्त वाहिकाओं को नुकसान होता रहता है। यही कारण है कि डायबिटीज़ के मरीजों में दिल की बीमारी का खतरा सामान्य लोगों से ज्यादा होता है। ऐसे में वैज्ञानिक लगातार ऐसे विकल्प खोज रहे हैं, जो दिल और धमनियों की सुरक्षा कर सकें।
इसी क्रम में एक अध्ययन फिलहाल चूहों पर किया गया है, जिनमें टाइप 1 डायबिटीज़ थी। इस स्टडी को 2026 के अमेरिकन फिजियोलॉजी शिखर सम्मेलन में प्रस्तुत किया जाएगा। अध्ययन में कुछ चूहों को करक्यूमिन दिया गया, जबकि बाकी को नहीं। एक महीने बाद जब दोनों समूहों की तुलना की गई, तो जिन चूहों को करक्यूमिन मिला था, उनकी रक्त वाहिकाएं कहीं अधिक स्वस्थ थीं। शोधकर्ताओं ने 'हीट शॉक प्रोटीन 70' नामक एक प्रोटीन का भी अध्ययन किया। ये प्रोटीन कोशिकाओं को तनाव से बचाता है। शोध में इसका संतुलन भी सुधरता दिखा।
इतना ही नहीं, दिल से खून ले जाने वाली मुख्य धमनी (महाधमनी) भी करक्यूमिन लेने वाले चूहों में बेहतर हालत में पाई गई। इससे संकेत मिलता है कि यह तत्व नसों की मजबूती और लचीलापन बनाए रखने में मदद कर सकता है।
हालांकि ये नतीजे बहुत उम्मीद जगाते हैं और करक्यूमिन को लेकर पहले से ही मौजूद संभावनाओं को बहुत आगे बढ़ाते हैं। लेकिन, यह रिसर्च अभी इंसानों पर नहीं, बल्कि जानवरों पर हुई है। इसलिए इसे सीधे इलाज मान लेना सही नहीं होगा। दूसरी बात यह भी जाननी जरूरी है कि सिर्फ ज्यादा हल्दी खाने या बाजार में मिलने वाले सप्लीमेंट लेने से वही फायदा मिलेगा, यह भी अभी तय नहीं है। रिसर्च में इस्तेमाल की गई मात्रा और उसे शरीर में पहुंचाने का तरीका काफी अलग होता है।
इन सबके बावजूद, इस अध्ययन से एक बात साफ होती है कि हल्दी में मौजूद करक्यूमिन को लेकर भविष्य में और बड़े स्तर पर शोध हो सकता है, जो डायबिटीज़ के मरीजों के लिए दिल से जुड़ी परेशानियों को कम करने का एक संभावित रास्ता बन सकता है। आने वाले समय में इंसानों पर होने वाले शोध ही तय करेंगे कि यह खोज कितनी कारगर साबित होती है।
फिलहाल सबसे जरूरी है संतुलित जीवनशैली- जैसे सही खानपान, नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज। इसलिए अगर आप कोई नया सप्लीमेंट लेने के बारे में सोच रहे हैं, तो पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। क्योंकि हर शरीर अलग होता है और बिना सही जानकारी के लिया गया कदम नुकसान भी पहुंचा सकता है।
--आईएएनएस
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