US Iran Conflict : 10 दिन की जंग में अमेरिका ने ईरान के 5,000 ठिकानों पर किए हमले : सेंटकॉम

सेंटकॉम के अनुसार, 10 दिनों में ईरान के हजारों सैन्य ठिकानों पर अमेरिकी हमले।
10 दिन की जंग में अमेरिका ने ईरान के 5,000 ठिकानों पर किए हमले : सेंटकॉम

वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव के बीच बड़ा खुलासा हुआ है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के मुताबिक, अमेरिका ने युद्ध के पहले 10 दिनों में ईरान के 5,000 से अधिक ठिकानों पर हमला किया है। यह हमला ईरान की सुरक्षा व्यवस्था और सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के लिए चलाए जा रहे बड़े सैन्य अभियान का हिस्सा है।

अमेरिकी सेना के अनुसार, 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' नाम का यह सैन्य अभियान 28 फरवरी को सुबह 1:15 बजे शुरू किया गया था। इस अभियान में अमेरिका की वायु सेना, नौसेना और मिसाइल सिस्टम का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है।

सेंटकॉम ने बताया कि यह अभियान अमेरिका के राष्ट्रपति के निर्देश पर शुरू किया गया। इसमें उन सभी ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है जो ईरान के सुरक्षा तंत्र से जुड़े हैं या जिनसे तत्काल खतरा पैदा होने की आशंका है।

सैन्य ऑपरेशन की जानकारी के मुताबिक, अब तक ईरान के 5,000 से अधिक सैन्य ठिकानों पर हमले किए जा चुके हैं। वहीं, युद्ध के पहले दस दिनों में ईरान के करीब 50 नौसैनिक जहाजों को नुकसान पहुंचाया गया है या नष्ट कर दिया गया है।

इस बड़े अभियान में अमेरिका के कई अत्याधुनिक हथियार और विमान शामिल हैं। लंबी दूरी तक मार करने वाले बी-1, बी-2 स्टेल्थ और बी-52 बमवर्षक विमान लगातार हमले कर रहे हैं। इसके साथ एफ-15, एफ-16, एफ-18, एफ-22 स्टेल्थ फाइटर और एफ-35 स्टेल्थ फाइटर जेट भी मिशन में तैनात हैं।

इसके अलावा, ए-10 अटैक एयरक्राफ्ट और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के लिए इस्तेमाल होने वाला ईए-18जी इलेक्ट्रॉनिक अटैक एयरक्राफ्ट भी इस अभियान का हिस्सा हैं।

अमेरिका के कई खुफिया और निगरानी विमान भी इस ऑपरेशन को समर्थन दे रहे हैं। इनमें यू-2 ड्रैगन लेडी, आरसी-135 रिकॉनिसेंस विमान और पी-8 मैरिटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट शामिल हैं। ये विमान ईरान की सैन्य गतिविधियों पर नजर रखते हुए संभावित लक्ष्यों की जानकारी दे रहे हैं।

ड्रोन भी इस अभियान में अहम भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिका एमक्यू-9 रीपर ड्रोन और एलयूसीएएस (कम लागत वाली मानवरहित लड़ाकू हमला प्रणाली) ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी और हमले दोनों के लिए कर रहा है।

अमेरिकी सेना ने अपने ठिकानों और सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइल सिस्टम और टीएचएएडी (टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस) एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम भी तैनात किए हैं।

नौसैनिक ताकत भी इस ऑपरेशन का अहम हिस्सा है। न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर और गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर समुद्र से इस अभियान को समर्थन दे रहे हैं, जबकि ईंधन और रसद पहुंचाने वाले जहाज लंबी दूरी के अभियानों को जारी रखने में मदद कर रहे हैं।

लॉजिस्टिक सपोर्ट के लिए सी-17 ग्लोबमास्टर और सी-130 कार्गो विमान लगातार हथियार, उपकरण और जरूरी सामान पहुंचा रहे हैं, जिससे यह बड़ा सैन्य अभियान जारी रह सके।

सेंटकॉम के मुताबिक जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया है उनमें कमांड और कंट्रोल सेंटर, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के मुख्यालय, खुफिया ठिकाने और इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं।

इसके अलावा बैलिस्टिक मिसाइल साइट, एंटी-शिप मिसाइल लोकेशन, ईरानी नौसेना के जहाज और पनडुब्बियां, सैन्य संचार नेटवर्क तथा बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन निर्माण से जुड़े ठिकानों पर भी हमले किए गए हैं।

अमेरिकी सेना ने यह भी बताया कि इस अभियान में काउंटर-ड्रोन सिस्टम, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एयरक्राफ्ट, कम्युनिकेशन रिले प्लेटफॉर्म और काउंटर रॉकेट, आर्टिलरी और मोर्टार डिफेंस सिस्टम भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं, जो इस ऑपरेशन के बड़े पैमाने को दर्शाते हैं।

सेंटकॉम के ऑपरेशनल सार में यह भी कहा गया है कि मिशन में कुछ ऐसी विशेष क्षमताएं भी इस्तेमाल की जा रही हैं जिनकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती, जिससे संकेत मिलता है कि कुछ गुप्त तकनीकों और सिस्टम का भी उपयोग किया जा रहा है।

--आईएएनएस

 

 

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