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पाकिस्तानी सैन्य बलों ने बलूचिस्तान में बरसाए बम, चार की मौत; शवों के साथ धरने पर बैठे लोग

Baloch

क्वेटा, 10 सितंबर(आईएएनएस)। पाकिस्तानी सेना ने एक बार फिर निहत्थे मासूम बलूचों पर बम बरसाए हैं। पाकिस्तान के फ्रंटियर कोर (एफसी) जवानों ने मस्तुंग जिले के करदिगाप तहसील स्थित रिहायशी इलाकों में गोले बरसाए। जिसकी चपेट में आए चार लोगों ने दम तोड़ दिया। इनमें बच्चे भी शामिल थे। घटना से नाराज स्थानीय लोगों ने हाईवे पर शवों के साथ धरान प्रदर्शन किया।

सूत्रों के हवाले से 'द बलूचिस्तान पोस्ट' ने बताया कि मंगलवार शाम एफसी (फ्रंटियर कोर) जवानों ने करदिगाप में भारी और अंधाधुंध गोलाबारी की, जिसमें कई गोले रिहायशी घरों पर गिरे।

रिपोर्ट के मुताबिक, कई गोले अब्दुल जलील सरपराह के घर पर गिरे, जिससे उनकी मां और दो बच्चियों की मौके पर ही मौत हो गई और कई अन्य लोग घायल हो गए।

घायलों में शामिल छह साल की एक बच्ची को गंभीर हालत में क्वेटा ले जाया गया, लेकिन बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई, जिससे इस घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर चार हो गई।

इस घटना के बाद अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू हो गया; स्थानीय लोगों ने मारे गए लोगों के शव क्वेटा-नुश्की हाईवे पर रख दिए, जिससे यातायात ठप हो गया।

यह हमला मस्तुंग में बढ़ती सैन्य गतिविधियों और पाकिस्तानी सेना द्वारा किए जा रहे हवाई व ड्रोन हमलों के बीच हुआ है, जिनमें आम नागरिकों की मौतें और वे घायल हो रहे हैं।

इससे पहले रविवार को, स्थानीय मीडिया ने सूत्रों के हवाले से बताया कि मस्तुंग के खदकोचा इलाके में पाकिस्तानी सेना के ड्रोन हमले में एक बच्चे समेत तीन लोग घायल हो गए थे।

यह हमला खदकोचा के गारो इलाके में हुआ, जिसके बाद घायलों को इलाज के लिए नवाब गौस बख्श रायसानी अस्पताल ले जाया गया।

बढ़ते "सुरक्षा उपायों" ने स्थानीय समुदायों और मानवाधिकार संगठनों के बीच इनके मानवीय परिणामों को लेकर चिंता पैदा कर दी है।

इसके अलावा, एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने कहा कि रविवार को मस्तुंग में दो जगहों से कम से कम छह अज्ञात शव मिलने से यह आशंका पैदा हो गई है कि ये शव उन बलूच युवाओं के हो सकते हैं जिन्हें पहले पाकिस्तानी सेना ने जबरन गायब कर दिया था।

घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए बीवीजे ने कहा कि "बलूचिस्तान में निर्दोष नागरिकों, खासकर युवाओं को कथित तौर पर उनके घरों, शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक सड़कों से जबरन गायब किया जा रहा है और गुप्त हिरासत केंद्रों में ले जाया जा रहा है, जहां उन्हें बुरी तरह प्रताड़ित किया जाता है।"

मानवाधिकार संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि जबरन गायब किए गए कई लोगों को हिरासत में ही मार दिया जाता है और बाद में उनकी मौत को मुठभेड़ (स्टेज्ड एनकाउंटर) का नतीजा दिखाने की कोशिश की जाती है।

--आईएएनएस

केआर/