अबू धाबी: पश्चिम एशिया में हालिया तनाव और अनिश्चितताओं के बीच खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासी एक “शांत लेकिन मजबूत ताकत” के रूप में उभरे हैं, जिन्होंने ऊर्जा बाजार, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और प्रवासी समुदायों में स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय समुदाय को आमतौर पर केवल रेमिटेंस और श्रम आंकड़ों के जरिए आंका जाता है, लेकिन इस बार उनकी भूमिका इससे कहीं आगे बढ़कर दिखाई दी। उन्होंने अपनी मजबूती, एकजुटता और संकट के समय सहयोग की भावना से न केवल मेजबान देशों बल्कि अन्य प्रवासियों को भी संभालने में अहम योगदान दिया।
रिपोर्ट में कहा गया कि संयुक्त अरब अमीरात इस पूरे घटनाक्रम का केंद्र रहा, जिसने एक बार फिर खुद को अस्थिर क्षेत्र में स्थिरता के वैश्विक केंद्र के रूप में साबित किया। खाड़ी क्षेत्र में 90 लाख से अधिक भारतीय प्रवासी रहते हैं, जिनमें से करीब 35 लाख केवल यूएई में हैं। यह दुनिया के सबसे बड़े प्रवासी समुदायों में से एक है, जिसने दशकों से अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत किया है और शहरों के निर्माण में योगदान दिया है।
हालिया तनाव के दौरान, जब यात्रा मार्ग प्रभावित हुए, संघर्ष की आशंका बढ़ी और गलत सूचनाएं फैलने लगीं, तब भारतीय समुदाय के नेटवर्क ने तेजी से सक्रिय होकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रिपोर्ट के अनुसार, अनौपचारिक सहायता समूह, व्यापारिक संगठन और रेजिडेंट वेलफेयर नेटवर्क तुरंत जुट गए। उन्होंने फंसे हुए श्रमिकों के लिए अस्थायी आवास की व्यवस्था की और खाड़ी क्षेत्र के भीतर स्थानांतरण के लिए परिवहन समन्वय किया।
इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत भारतीय पेशेवरों ने जरूरी सेवाओं को सुचारू बनाए रखा। स्वास्थ्य क्षेत्र में भारतीय डॉक्टरों और नर्सों ने अस्पतालों की सेवाएं निर्बाध रूप से जारी रखीं, जबकि लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और खुदरा क्षेत्रों में काम कर रहे भारतीयों ने आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित नहीं होने दिया।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि ऊर्जा ढांचे और बंदरगाह संचालन में भारतीय विशेषज्ञता ने खाड़ी देशों की महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाई, जिसका असर केवल इन देशों तक सीमित नहीं रहा बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा।
आर्थिक योगदान से परे, इस दौरान मानवीय पहल सबसे उल्लेखनीय रही। भारतीय प्रवासियों ने मिलकर दैनिक मजदूरों, नए आए लोगों और रोजगार अनिश्चितता का सामना कर रहे लोगों की मदद की। सामुदायिक रसोई, आपातकालीन फंड और स्वयंसेवी नेटवर्क जरूरतमंदों के लिए सहारा बने।
यूएई में भारतीय स्कूलों और सांस्कृतिक संगठनों ने भी समन्वय के लिए अपने दरवाजे खोले। डिजिटल युग में फैल रही गलत सूचनाओं के बीच समुदाय के नेताओं ने सही जानकारी फैलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे घबराहट को रोका जा सका।
रिपोर्ट में कहा गया कि अनिश्चितताओं से भरी दुनिया में यह “लोगों द्वारा संचालित स्थिरता” का एक प्रभावशाली मॉडल है, जो दिखाता है कि विदेशों में किसी देश की ताकत केवल उसकी कूटनीति से नहीं, बल्कि उसके लोगों के चरित्र से भी मापी जाती है।
--आईएएनएस