अमेरिकी रिपोर्ट में बड़ा दावा, चीन पर ईरान को हथियार और खुफिया मदद देने के आरोप

चीन-ईरान सैन्य सहयोग के आरोपों से पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव
अमेरिकी रिपोर्ट में बड़ा दावा, चीन पर ईरान को हथियार और खुफिया मदद देने के आरोप

बीजिंग/तेहरान: एक रिपोर्ट में कहा गया क‍ि चीन पर यह आरोप है कि वह ईरान को अमेरिका की खाड़ी क्षेत्र में सैन्य तैनाती से जुड़ी खुफिया जानकारी देने के साथ-साथ निगरानी सिस्टम भी उपलब्ध करा रहा है। साथ ही, वह ईरान की हथियार बनाने की क्षमता बढ़ाने में भी मदद कर रहा है।

एशिया न्यूज पोस्ट की रिपोर्ट में कहा गया, “ईरान की सरकार को चीन द्वारा हथियार और तकनीक देना कोई नई बात नहीं है। लेकिन बीजिंग के सामने मुश्किल यह है कि उसे खाड़ी के दूसरे देशों के साथ भी अच्छे रिश्ते बनाए रखने हैं और साथ ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी नाराज नहीं करना है, खासकर राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होने वाली उनकी तय बैठक से पहले।”

रिपोर्ट में आगे कहा गया, “चीन ऐसा जोखिम नहीं उठा सकता कि उसके रिश्ते यूएई, सऊदी अरब, कुवैत और बहरीन जैसे खाड़ी देशों से खराब हो जाएं। इन देशों पर मौजूदा युद्ध के दौरान ईरान ने मिसाइलें दागी थीं, जिनमें से कई या तो चीन की बनी थीं या फिर चीनी तकनीक से तैयार की गई थीं।”

अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा गया कि चीन आने वाले कुछ हफ्तों में ईरान को नए एयर डिफेंस सिस्टम देने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान शायद मौजूदा युद्धविराम के दौरान अपने हथियारों के भंडार को फिर से मजबूत करने में लगा है और इसमें उसके विदेशी सहयोगी मदद कर रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया, “अगर अब चीन पीछे हटता है, तो ईरान में उसकी पकड़ कमजोर पड़ सकती है। चीन ऐसा नहीं चाहता क्योंकि मध्य पूर्व में अमेरिका के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए ईरान उसका बड़ा आधार माना जाता है। ऐसी भी खबरें हैं कि चीन हथियारों की खेप को तीसरे देशों के रास्ते भेजने की योजना बना रहा है, ताकि असली स्रोत छिपाया जा सके।”

रिपोर्ट के अनुसार, जिन सिस्टमों को चीन ईरान को देने की तैयारी कर रहा है, उनमें 'मैनपैड्स,' यानी कंधे पर रखकर चलाए जाने वाले एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम शामिल हैं। ये कम ऊंचाई पर उड़ने वाले अमेरिकी सैन्य विमानों के लिए खतरा बन सकते हैं। ये मिसाइल सिस्टम इस्तेमाल में आसान होते हैं और 'फायर एंड फॉरगेट' तकनीक पर काम करते हैं, यानी एक बार दागने के बाद इन्हें दोबारा नियंत्रित करने की जरूरत नहीं पड़ती।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया कि चीन ईरान को ऐसे मिसाइल सिस्टम दे सकता है।

एशियन न्यूज पोस्ट के मुताबिक, पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, “अगर चीन ऐसा करता है, तो उसे बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।”

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ईरान की सेना आईआरजीसी को बीजिंग की एक सैटेलाइट सर्विस कंपनी के कमर्शियल ग्राउंड स्टेशन नेटवर्क तक पहुंच दी गई है। इस कंपनी का नेटवर्क एशिया के कई हिस्सों में फैला हुआ है। इसी सैटेलाइट ने मध्य पूर्व के कई एयरबेस और दूसरे ठिकानों की तस्वीरें ली थीं, जिन पर ईरान ने मिसाइल हमले किए थे। इनमें सऊदी अरब का प्रिंस सुल्तान एयर बेस भी शामिल है, जहां तैनात एक अमेरिकी विमान को नुकसान पहुंचा था।

बताया गया कि इस सैटेलाइट ने जॉर्डन के मुवाफ्फाक साल्ती एयर बेस, बहरीन की राजधानी मनामा में मौजूद अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय के आसपास के इलाकों और इराक के एरबिल एयरपोर्ट की गतिविधियों पर भी नजर रखी थी। आईआरजीसी ने दावा किया था कि इन जगहों को उसने अपने ऑपरेशन के दौरान निशाना बनाया था।

रिपोर्ट में कहा गया, “पश्चिमी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि चीन की कोई भी कंपनी सरकार की मंजूरी के बिना ईरान को ऐसी सैटेलाइट पहुंच नहीं दे सकती। चीनी अधिकारी ईरान को खुफिया मदद दे रहे हैं, लेकिन कोशिश यह है कि सरकार की सीधी भूमिका सामने न आए।”

--आईएएनएस