C P Radhakrishnan Book Launch : उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शशि थरूर की किताब का किया विमोचन

श्री नारायण गुरु के समानता संदेश पर आधारित पुस्तक का दिल्ली में लोकार्पण
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शशि थरूर की किताब का किया विमोचन

नई दिल्ली: भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में सांसद डॉ. शशि थरूर द्वारा लिखित पुस्तक 'द सेज हू रीइमैजिन्ड हिंदूइज्म: द लाइफ, लेसन्स एंड लेगेसी ऑफ श्री नारायण गुरु, का विमोचन किया।

सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री नारायण गुरु, ऐसे वक्त में आध्यात्मिक गुरु के रूप में उभरे, जब समाज में जातिगत विभाजन और सामाजिक भेदभाव गहराई से जड़े जमा चुके थे। उन्होंने कहा कि गुरु जी का अमर संदेश, "मानव जाति के लिए एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर," न केवल एक आध्यात्मिक उद्घोषणा थी, बल्कि समानता, गरिमा और सार्वभौमिक बंधुत्व के लिए एक क्रांतिकारी आह्वान भी था।

उपराष्ट्रपति ने बताया कि श्री नारायण गुरु ने समावेशी मंदिर की स्थापना और शिक्षा को बढ़ावा देने जैसी पहलों के जरिए ज्ञान और करुणा से अन्याय को चुनौती दी। पिछले वर्ष दिसंबर में शिवगिरि मठ की अपनी यात्रा का जिक्र करते हुए उन्होंने शिवगिरि को सबसे पवित्र स्थानों में से एक बताया, जो सभी को समानता और सम्मान के साथ व्यवहार करने के लिए प्रेरित करता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों को उद्धृत करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि गुरु जी की शिक्षाएं सामाजिक न्याय के लिए एक मार्गदर्शक का काम करती हैं और भेदभाव को खत्म करने और समावेशी विकास को बढ़ावा देने के प्रयासों का मार्गदर्शन करती रहती हैं।

भारत की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि आदि शंकराचार्य, रामानुजाचार्य और श्री नारायण गुरु जैसे संतों और समाज सुधारकों ने अपनी आध्यात्मिक शिक्षाओं के जरिए समाज को नया रूप दिया, अन्याय को चुनौती दी, अंधविश्वास को दूर किया और प्रत्येक नागरिक को सम्मान दिलाया। उन्होंने कहा कि यदि आदि शंकराचार्य न होते तो आज भारत एकजुट न होता।

डॉ. शशि थरूर द्वारा पुस्तक लेखन की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह पुस्तक भारत की सभ्यतागत विरासत की वैश्विक पहुंच का विस्तार करेगी। उन्होंने डॉ. थरूर को एक विशिष्ट राजनयिक, सांसद और लेखक बताया, जिन्होंने बेहद स्पष्टता और ऐतिहासिक गहराई के साथ सार्वजनिक चर्चा को और समृद्ध किया है। उन्होंने आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस के भारत के एकजुट और दृढ़ संदेश को दुनिया भर में फैलाने के लिए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के डॉ. थारूर के नेतृत्व का भी उल्लेख किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह पुस्तक श्री नारायण गुरु के जीवन और शिक्षाओं पर प्रकाश डालती है, जिन्होंने आत्मसम्मान, ईमानदारी से श्रम और सामाजिक परिवर्तन पर बल देकर वंचित समुदायों को सशक्त बनाया। उन्होंने 1903 में स्थापित श्री नारायण धर्म परिपालन (एसएनडीपी) योगम का भी उल्लेख किया, जिसने शिक्षा, संस्था निर्माण और सामाजिक-आर्थिक उत्थान के जरिए गुरु जी के मिशन को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि आध्यात्मिक और सामाजिक सुधारकों के जीवन और उनके योगदान का दस्तावेजीकरण भारत की सभ्यतागत स्मृति की रक्षा के लिए बेहद जरुरी है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पुस्तक विद्वानों को गहन शोध करने, युवाओं को आलोचनात्मक चिंतन करने और समाज को जिम्मेदारी से कार्य करने के लिए प्रेरित करेगी।

सभी से समानता, एकता और शिक्षा के आदर्शों के प्रति स्वयं को फिर से समर्पित करने का आह्वान करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि एसएनडीपी आंदोलन द्वारा सुदृढ़ किए गए और इस पुस्तक जैसे विद्वतापूर्ण कार्यों के जरिए व्यक्त किया गया श्री नारायण गुरु का दृष्टिकोण, न्याय, सद्भाव और मानवीय गरिमा पर आधारित समाज के निर्माण के लिए राष्ट्र को प्रेरित करती रहेगा।

--आईएएनएस

 

 

Related posts

Loading...

More from author

Loading...