मुंबई, 10 जुलाई (आईएएनएस)। कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने शुक्रवार को महाराष्ट्र विधानसभा में 'श्री राम मंदिर देवस्थान ट्रस्ट मैनेजमेंट, रामटेक बिल' के कई प्रावधानों का कड़ा विरोध किया। उन्होंने मांग की कि इस कानून की व्यापक समीक्षा के लिए इसे एक संयुक्त समिति को भेजा जाए।
धार्मिक संस्थानों में राजनीतिक दखलअंदाजी पर चिंता जताते हुए वडेट्टीवार ने कहा कि रामटेक मंदिर जैसी पवित्र और ऐतिहासिक जगह को जल्दबाजी में लिए गए फैसलों से बचाया जाना चाहिए।
उन्होंने मंदिर के ट्रस्ट बोर्ड में जन प्रतिनिधियों और राजनीतिक हस्तियों को शामिल करने का कड़ा विरोध किया। इसके बजाय उन्होंने सुझाव दिया कि बोर्ड में आस्था रखने वाले, सेवा-भाव वाले और बेदाग छवि वाले लोग होने चाहिए।
वडेट्टीवार ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा तीन सप्ताह लंबे विधानसभा सत्र के आखिरी दिन इस कानून को आगे बढ़ाने की जल्दबाजी पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि कोर्ट द्वारा नियुक्त मौजूदा कमेटी बिना किसी गड़बड़ी या कुप्रबंधन के सुचारू रूप से काम कर रही है। उन्होंने कहा, "अभी नया ट्रस्ट बोर्ड बनाने की क्या जरूरत है? मंदिर के मैनेजमेंट में राजनीति लाने से भक्तों की आस्था डगमगाती है।"
अयोध्या के राम मंदिर में हाल ही में हुई वित्तीय गड़बड़ी और चोरी के आरोपों का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेता ने जोर दिया कि ऐसी घटनाओं से भक्तों की भावनाएं आहत होती हैं। उन्होंने पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि जनता से मिले दान का इस्तेमाल पूरी जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए।
ट्रस्ट के सदस्यों को वित्तीय भत्ता देने के प्रावधान पर गंभीर आपत्ति जताते हुए वडेट्टीवार ने पूछा, "भक्तों द्वारा दिए गए दान से सदस्यों को भत्ता क्यों मिलना चाहिए? भगवान राम के मंदिर में सेवा का काम शुद्ध भक्ति और सेवा की भावना से प्रेरित होना चाहिए।"
उन्होंने ट्रस्टियों के लिए सख्त योग्यता मापदंड की भी मांग की और कहा कि जिस किसी पर भी एक भी आपराधिक मामला, भ्रष्टाचार का आरोप या अनैतिक आचरण का रिकॉर्ड हो, उसे बोर्ड में शामिल होने के लिए अयोग्य ठहराया जाना चाहिए।
अपनी बात को पुख्ता करने के लिए उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का हवाला देते हुए कहा, "अगर रखवाली करने वाला कुत्ता चोरों पर नहीं भौंकता तो इसका मतलब है कि वह चोरों को जानता है।"
नियुक्त किए जाने वाले लोगों की ईमानदारी को सबसे अहम बताते हुए वडेट्टीवार ने कहा कि आलोचक उन्हें 'भाड़े के लोग' या 'कुत्ते' जैसे अपमानजनक शब्दों से बुला रहे हैं, जबकि वे तो बस एक अहम विधायी मामले पर अपना मजबूत पक्ष रखने का अपना फर्ज निभा रहे हैं।
रामटेक मंदिर हजारों साल पुरानी परंपरा और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। इस बात पर जोर देते हुए वडेट्टीवार ने कहा कि मुख्य ध्यान मंदिर के संरक्षण, रखरखाव और पुनर्निर्माण पर होना चाहिए, जिसमें राजनीति का कोई दखल न हो।
उन्होंने विशेष रूप से बोर्ड में विधायकों, मंत्रियों या मेयरों की नियुक्ति का विरोध किया। उन्होंने सवाल किया, "विधायक और मंत्री अपने-अपने चुनाव क्षेत्रों के कामों में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में मंदिर के रोजमर्रा के कामकाज की देखरेख कौन करेगा? ज़िम्मेदारी कौन लेगा?"
अपनी बात खत्म करते हुए वडेट्टीवार ने कहा कि भगवान राम आस्था और संस्कृति के प्रतीक हैं। देवता के नाम पर बनाई जाने वाली किसी भी व्यवस्था का आधार राजनीति के बजाय पारदर्शिता और जनता का भरोसा होना चाहिए। उन्होंने सदन से आग्रह किया कि इस बिल को एक संयुक्त समिति के पास भेजा जाए ताकि सभी संबंधित पक्षों के सुझावों पर अच्छी तरह से विचार किया जा सके और श्रद्धालुओं की आस्था की रक्षा हो सके।
--आईएएनएस
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