Shyamamani Devi Biography : श्याममणि देवी, जिन्होंने अपनी मधुर आवाज से ओडिसी शास्त्रीय संगीत को दी नई पहचान

ओडिसी संगीत को नई पहचान देने वाली श्याममणि देवी का प्रेरणादायक सफर
श्याममणि देवी, जिन्होंने अपनी मधुर आवाज से ओडिसी शास्त्रीय संगीत को दी नई पहचान

नई दिल्ली: 21 दिसंबर... सिर्फ एक तारीख नहीं है, बल्कि उससे कहीं ज्यादा है, क्योंकि इसी दिन 1938 में ओडिसी शास्त्रीय संगीत की दुनिया को नई दिशा देने वाली एक नन्हीं मुस्कान और मधुर आवाज का जन्म हुआ था। ये कोई और नहीं, बल्कि श्याममणि देवी हैं। राजेंद्र मोहन पटनायक और निशामणि पटनायक की सबसे छोटी बेटी श्याममणि, परिवार के लिए तो खुशियों की किरण थीं, लेकिन किसे पता था कि यह बच्ची भविष्य में ओडिसी शास्त्रीय संगीत को नई पहचान देने वाली होगी?

बचपन में ही संगीत की ओर उनका आकर्षण देखने लायक था। घर में जहां सभी अपने-अपने कामों में व्यस्त थे, वहीं श्याममणि अपने छोटे-छोटे हाथों से साज बजाने और गीत गाने में मशगूल रहतीं। हालांकि, उस समय समाज महिलाओं के लिए संगीत में आगे बढ़ना आसान नहीं मानता था, लेकिन श्याममणि ने कभी हार नहीं मानी। पिता राजेंद्र मोहन पटनायक और उनके मामा, प्रख्यात संगीतकार कालीचरण पटनायक, उनके सपनों के सबसे बड़े समर्थक बने।

12 साल की उम्र में उन्होंने अपने संगीत सफर की शुरुआत ऑल इंडिया रेडियो, कटक से की, जब एक मासूम आवाज रेडियो की लहरों में गूंज उठी और लोगों के दिलों को छू गई। फिर उनके जीवन में गुरु सिंघारी श्यामसुंदर कर और पंडित बालकृष्ण दास आए, जिन्होंने उन्हें शास्त्रीय ओडिसी संगीत के जादू में पारंगत किया। इसके अलावा, बी.आर. देवधर और कुंडला आदिनारायण राव से भी उन्होंने प्रशिक्षण लिया। यही नहीं, उन्होंने छंदा, चंपू, पारंपरिक ओडिया लोक संगीत और ओडिया फिल्म संगीत में भी महारत हासिल की। उनके गाए गीतों ने उपेंद्र भांजा, कबीसूरज्य बालादेबा रथ, बनमाली दास और गोपालकृष्ण जैसे महान कवियों की रचनाओं को नई जिंदगी दी।

समय के साथ श्याममणि देवी की मधुर आवाज सिर्फ सुर और ताल तक सीमित नहीं रही। उनके गीतों में भावनाओं की गहराई, संस्कृति की मिठास और जीवन की सौंदर्यबोध झलकने लगी। उन्होंने संगीत के माध्यम से लोगों के दिलों को छुआ और युवा पीढ़ी को भी प्रेरित किया।

2018 में उनके जीवन पर आधारित डॉक्यूमेंट्री 'श्याममणि देवी – ओडिसी शास्त्रीय गायिका' आई, जिसमें उनके संघर्ष, समर्पण और अद्भुत गायकी को दर्शाया गया।

2022 में, उनकी उत्कृष्ट गायिकी और योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल उनके नाम के लिए नहीं, बल्कि ओडिसी संगीत के संरक्षण और प्रसार के उनके अमूल्य योगदान के लिए था।

--आईएएनएस

 

 

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