सुखोई-57 दुनिया के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों में गिना जाता है: रक्षा विशेषज्ञ प्रफुल्ल बख्शी

सुखोई-57 दुनिया के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों में गिना जाता है: रक्षा विशेषज्ञ प्रफुल्ल बख्शी

नई दिल्ली, 6 जून (आईएएनएस)। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ओर से भारत को अत्याधुनिक सुखोई-57 (एसयू-57) लड़ाकू विमान की पेशकश किए जाने के बाद इस पर चर्चा तेज हो गई है। रक्षा विशेषज्ञ प्रफुल्ल बख्शी का मानना है कि यदि भारत रूस के साथ मिलकर सुखोई-57 के संयुक्त विकास और निर्माण की दिशा में आगे बढ़ता है, तो इससे न केवल भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ेगी, बल्कि स्वदेशी रक्षा तकनीक को भी बड़ा लाभ मिलेगा।

प्रफुल्ल बख्शी ने आईएएनएस से कहा कि वर्तमान समय में भारत को सबसे अधिक जरूरत उन्नत रक्षा तकनीकों की है। उन्होंने बताया कि इंजन तकनीक, एवियोनिक्स तकनीक, कॉकपिट डिजाइन, ग्लास कॉकपिट और अन्य आधुनिक रक्षा प्रणालियां भारत की प्रमुख आवश्यकताओं में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भारत को विशेष रूप से इंजन तकनीक की जरूरत है। अमेरिका भले ही तेजस लड़ाकू विमान के लिए जीई-404 इंजन उपलब्ध करा रहा हो, लेकिन भारत अभी तक पूरी तरह स्वदेशी लड़ाकू विमान इंजन विकसित नहीं कर पाया है।

सुखोई-57 की खूबियों का जिक्र करते हुए प्रफुल्ल बख्शी ने कहा कि यह दुनिया के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों में गिना जाता है। यह एक ट्विन-इंजन, स्टेल्थ क्षमता वाला और अत्यधिक फुर्तीला फाइटर जेट है। इसके अलावा यह ध्वनि की गति से अधिक रफ्तार यानी सुपरसोनिक उड़ान भरने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध की जरूरतों को देखते हुए ऐसे विमान की आवश्यकता है।

रक्षा विशेषज्ञ ने बताया कि अल्जीरिया समेत कुछ देशों के पास पहले से सुखोई-57 मौजूद है और संभवतः इसकी आपूर्ति भी शुरू हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी आधुनिक तकनीक और युद्धक्षमता है, जो इसे अन्य लड़ाकू विमानों से अलग बनाती है।

रूस की पेशकश पर टिप्पणी करते हुए प्रफुल्ल बख्शी ने कहा कि रूस अच्छी तरह जानता है कि भारत को इस तरह के उन्नत लड़ाकू विमान की जरूरत है। उन्होंने बताया कि भारतीय वायुसेना की आवश्यकता लगभग 42.5 से 43 स्क्वाड्रन की है, जबकि वर्तमान में उसके पास केवल 29 स्क्वाड्रन ही उपलब्ध हैं, जिसका मतलब है कि हमारे पास 13-14 स्क्वाड्रन कम हैं।

--आईएएनएस

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