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राजस्थान निकाय चुनाव: राज्य चुनाव आयोग करेगा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा

राजस्थान

जयपुर, 19 अगस्त (आईएएनएस)। राजस्थान राज्य चुनाव आयोग बुधवार को राज्य के सभी 309 शहरी स्थानीय निकायों के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करने जा रहा है। इस घोषणा के साथ ही, शहरी स्थानीय निकायों में तुरंत आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी और चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक प्रभावी रहेगी।

राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करेंगे।

आचार संहिता लागू होने के बाद, सरकार को उन शहरी इलाकों में नए विकास प्रोजेक्ट्स की घोषणा करने की अनुमति नहीं होगी जहां चुनाव हो रहे हैं। कोई नया वर्क ऑर्डर जारी नहीं किया जा सकता और न ही नए प्रोजेक्ट शुरू किए जा सकते हैं। हालांकि, मौजूदा मंजूरी के आधार पर चल रहे विकास कार्य जारी रहेंगे। मॉडल कोड लागू रहने के दौरान नए प्रोजेक्ट्स के उद्घाटन और शिलान्यास समारोहों पर भी रोक रहेगी।

309 शहरी स्थानीय निकायों में 10,245 पार्षद सीटों के लिए चुनाव होंगे। इन निकायों में 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगरपालिकाएं शामिल हैं।

सबसे पहले पार्षद पद के लिए चुनाव होंगे, उसके बाद मेयर, नगर परिषद अध्यक्ष और नगरपालिका अध्यक्षों के चुनाव होंगे।

309 शहरी स्थानीय निकायों में मेयर और अध्यक्ष के पद अलग-अलग वर्गों के लिए आरक्षित किए गए हैं। 60 पद ओबीसी के लिए, 50 अनुसूचित जाति (एससी) के लिए और 11 अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित हैं। महिलाओं के लिए कुल 3,356 सीटें आरक्षित हैं, जिसमें सभी वर्गों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण है। 10,245 वार्डों में से 1,933 ओबीसी के लिए, 1,794 एससी के लिए और 395 एसटी के लिए आरक्षित हैं। कुल 6,123 वार्ड अनारक्षित हैं, जिनमें 4,120 ओपन सीटें और 2,003 महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें शामिल हैं।

ये चुनाव राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद कराए जा रहे हैं। कोर्ट ने शहरी स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनाव में देरी पर चिंता जताई थी और निर्देश दिया था कि चुनाव 15 नवंबर तक पूरे कर लिए जाएं।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि आरक्षण लॉटरी प्रक्रिया 15 अगस्त तक पूरी कर ली जाए। स्थानीय स्वशासन विभाग ने पदों और वार्डों के आरक्षण के लिए लॉटरी प्रक्रिया पूरी कर ली है और विवरण राज्य चुनाव आयोग को भेज दिया है।

शहरी स्थानीय निकाय चुनाव आचार संहिता लागू होने से सरकार की विधायी योजनाओं पर भी असर पड़ने की उम्मीद है। मॉडल कोड की पाबंदियों के कारण, आगामी विधानसभा सत्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) बिल और खेजड़ी के पेड़ों के संरक्षण से जुड़े प्रस्तावित कानून के पारित होने की संभावना कम है।

मानसून सत्र गुरुवार से शुरू होने वाला है और यह दो दिनों तक चलेगा। सत्र के दौरान दोनों बिल पेश किए जा सकते हैं, जबकि चुनाव से जुड़ी पाबंदियां हटने के बाद विधायी प्रक्रिया पूरी करने के लिए सरकार नवंबर में विधानसभा का सत्र फिर से बुलाने पर विचार कर सकती है।

--आईएएनएस

डीकेएम/पीएम