NIA Chargesheet : एनआईए ने उत्तर भारत में माओवादी संगठन को पुनर्जीवित करने की साजिश में दूसरी चार्जशीट दाखिल की

एनआईए ने माओवादी नेटवर्क साजिश में विशाल सिंह पर गंभीर आरोप लगाए
एनआईए ने उत्तर भारत में माओवादी संगठन को पुनर्जीवित करने की साजिश में दूसरी चार्जशीट दाखिल की

नई दिल्ली: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने शनिवार को एक बड़े खुलासे में उत्तर प्रदेश के मथुरा निवासी विशाल सिंह उर्फ सूरज के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी। विशाल पर आरोप है कि वह प्रतिबंधित आतंकी संगठी संगठन सीपीआई (माओवादी) को उत्तर भारत में फिर से खड़ा करने की खतरनाक साजिश का हिस्सा था।

यह मामला उत्तर भारत के सात राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ में माओवादी संगठन की कमजोर होती पकड़ को दोबारा मजबूत करने से जुड़ा है। एनआईए ने विशाल सिंह पर देशद्रोह की धारा 121ए के साथ-साथ गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (यूएपीए) की धारा 18, 20, 38 और 39 लगाई है।

यह वही केस है, जिसमें फरवरी 2025 में पहली चार्जशीट अजय सिंघल उर्फ अमन के खिलाफ दाखिल की गई थी। जांच में पता चला है कि माओवादी संगठन के नेता, कैडर और उनके शहरों में छिपे समर्थक मिलकर उत्तर भारत में नया नेटवर्क बना रहे थे।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विशाल सिंह बिहार-झारखंड सीमा पर स्थित घने जंगलों छकरबंधा और पचरुखिया इलाके में दस दिन तक रहा। वहां उसने माओवादी लड़ाकों को ड्रोन उड़ाने और उसका इस्तेमाल करने की पूरी ट्रेनिंग दी। इसके अलावा उसने संगठन के वरिष्ठ नेता प्रमोद मिश्रा उर्फ सोहन दा और बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी के सेंट्रल कमेटी सदस्य संदीप यादव उर्फ रूपेश के साथ कई गोपनीय बैठकें भी कीं।

एनआईए का कहना है कि विशाल सिंह का काम सिर्फ तकनीकी मदद तक सीमित नहीं था। वह संगठन को हथियार, ट्रेनिंग और खुफिया जानकारी मुहैया कराने में भी सक्रिय था। उसका मकसद उत्तर भारत में माओवादी गतिविधियों को फिर से शुरू कराना था।

अभी तक इस मामले में दो लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है और कई आरोपी फरार हैं। एनआईए ने साफ किया है कि जांच अभी जारी है और जल्द ही और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

--आईएएनएस

 

 

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