सतना, 11 सितंबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के सतना जिले के प्रशासन ने चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के किनारे हुए निर्माण कार्यों और अतिक्रमण की जांच के लिए पांच सदस्यों की एक टीम बनाई है। यह कदम पिछले हफ्ते नदी में आई बाढ़ के बाद उठाया गया है।
कलेक्टर सतीश कुमार एस. ने बताया कि मझगवां के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट की अगुवाई वाली टीम उन ढांचों की पहचान करेगी जो नदी के प्राकृतिक बहाव में रुकावट डाल रहे हैं और मंदाकिनी नदी के हाई फ्लड लेवल (एचएफएल) का भी आकलन करेगी। उन्होंने कहा कि यह जांच सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की गाइडलाइंस के अनुसार की जाएगी।
28-29 अगस्त की रात आई बाढ़ के दौरान आरोग्यधाम के पास मंदाकिनी नदी का जलस्तर 145.76 मीटर तक पहुंच गया था, जबकि इसका तय एचएफएल 139.60 मीटर है। बाढ़ में हनुमानधारा पुल भी बह गया था।
उन्होंने कहा, "टीम उन निर्माणों और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर की पहचान करेगी जो नदी के प्राकृतिक बहाव में रुकावट डाल रहे हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।"
इस टीम में चीफ म्युनिसिपल ऑफिसर, नायब तहसीलदार, पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट और वॉटर रिसोर्स डिपार्टमेंट के सब-डिविजनल ऑफिसर और म्युनिसिपल काउंसिल के सब-इंजीनियर शामिल हैं।
जांच के दौरान नदी के किनारे गैर-कानूनी प्लॉटिंग और सरकारी व प्राइवेट निर्माण कार्यों की जांच की जाएगी।
प्रशासन पुरानी और ढांचागत रूप से कमजोर इमारतों की भी पहचान करेगा और यह देखेगा कि क्या वे तय नियमों का पालन करती हैं। आधिकारिक बयान के अनुसार, नदी के किनारे वाले इलाकों में नए निर्माण और दोबारा बनाई गई इमारतों की भी सुरक्षा के नजरिए से जांच की जाएगी।
कलेक्टर ने कहा, "इस कवायद का मकसद बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करना और भविष्य में नदी का जलस्तर बढ़ने पर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।"
यह कदम शहरी विकास और आवास मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के उस बयान के कुछ दिनों बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि मंदाकिनी नदी के बहाव में बाधा डालने वाले सरकारी और प्राइवेट अतिक्रमण हटाए जाएंगे।
उम्मीद है कि इस जांच से प्रशासन को नियमों के उल्लंघन की पहचान करने और नदी के बहाव में रुकावट को रोकने के लिए आगे की कार्रवाई तय करने में मदद मिलेगी।
--आईएएनएस
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