तिरुवनंतपुरम, 11 सितंबर (आईएएनएस)। केरल पब्लिक सर्विस कमीशन और क्राइम ब्रांच के बीच टकराव की स्थिति बनती दिख रही है, क्योंकि केरल स्टेट प्लानिंग बोर्ड की परीक्षा में गड़बड़ी के मामले में पूछताछ के लिए भर्ती पैनल के सदस्यों के स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) के सामने पेश होने की संभावना कम है।
पता चला है कि चेयरमैन एमआर. बैजू समेत 16 मौजूदा सदस्यों ने तय किया है कि वे क्राइम ब्रांच हेडक्वार्टर में पेश नहीं होंगे, भले ही उन्हें जल्द ही नोटिस जारी किए जाएं।
इसके बजाय, पीएससी नोटिस मिलने के बाद सदस्यों को बुलाने के तरीके को चुनौती देने की तैयारी कर रही है।
उम्मीद है कि सदस्य और चेयरमैन गृह सचिव को पत्र लिखेंगे। वे बताएंगे कि वे संवैधानिक पदों पर हैं और संवैधानिक संस्था के दर्जे और गरिमा की रक्षा की जानी चाहिए।
आयोग नोटिस की वैधता पर वरिष्ठ वकीलों से कानूनी राय भी ले रहा है।
यह मामला अब संवैधानिक संस्था और जांच एजेंसी के बीच एक बड़े कानूनी टकराव में बदल सकता है। हालांकि, क्राइम ब्रांच का रुख अलग है।
सरकारी कानूनी हलकों का कहना है कि जांच अधिकारी के पास यह तय करने का अधिकार है कि गवाहों या संदिग्धों से कहां पूछताछ की जाए और जांच की जरूरतों के आधार पर आपराधिक प्रक्रिया के तहत नोटिस जारी किया जा सकता है।
कानूनी सूत्रों ने कहा कि संवैधानिक संस्था का सदस्य होने से ही आपराधिक प्रक्रिया से छूट नहीं मिल जाती।
क्राइम ब्रांच के एसपी जकारिया की अगुवाई वाली एसआईटी ने पीएससी सदस्यों से पूछताछ करने का फैसला किया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब एसआईटी केरल राज्य योजना बोर्ड में की गई दो विवादास्पद नियुक्तियों को रद्द करने की सिफारिश करने की तैयारी कर रही है।
ये नियुक्तियां परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित खामियों की व्यापक जांच का हिस्सा हैं।
जांच में पहले दो पीएससी अधिकारियों की ओर से गंभीर खामियां पाई गई थीं, जिनमें से एक रिटायर हो चुका है।
राज्य पुलिस प्रमुख ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की है।
एसआईटी अब यह जांच कर रही है कि क्या ये खामियां महज प्रशासनिक विफलताएं थीं या कुछ खास उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने के लिए जानबूझकर रची गई साजिश थी।
पीएससी सदस्यों से पूछताछ का कदम जांच के दायरे को काफी बढ़ा देता है। मौजूदा पीएससी में 21 की स्वीकृत संख्या के मुकाबले 16 सदस्य हैं। चेयरमैन समेत सभी मौजूदा सदस्यों की नियुक्ति पिछली विजयन सरकार के कार्यकाल के दौरान हुई थी।
राजनीतिक पृष्ठभूमि इस बढ़ते विवाद में एक नया पहलू जोड़ सकती है। परीक्षा मामले में अब तक किसी को औपचारिक रूप से आरोपी नहीं बनाया गया है।
--आईएएनएस
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