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12 सितंबर का पंचांग: श्रीहरि की पूजा करना फलदाई, सुबह 11:58 बजे से दोपहर 12:47 बजे तक अभिजीत मुहूर्त

कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है
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नई दिल्ली, 11 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है।

12 सितंबर 2026 (शनिवार) को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि, सुबह 7:46 बजे तक है। इसके बाद द्वितीया हो जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार और डोल ग्यारस का पर्व है, श्रीहरि की पूजा करना फलदाई रहेगा।

शनिवार सुबह 6:16 बजे सूर्योदय और शाम 6:30 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, सुबह 7:07 बजे चंद्रोदय और शाम 7:13 बजे चंद्रास्त होगा। पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा, जबकि चंद्रमा उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा।

शनिवार को दोपहर 03:09 तक शुभ योग रहेगा, जिसके बाद शुक्ल योग लगेगा शुरू हो जाएगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:58 बजे से दोपहर 12:47 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है। अमृत काल सुबह 5:49 से 7:23 बजे तक रहेगा।

वहीं, राहुकाल सुबह 9:19 बजे से 10:51 बजे और गुलिक काल सुबह 6:16 से 7:48 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, यमगंड काल दोपहर 1:54 से शाम 3:26 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए क्योंकि इन्हें अशुभ समय माना जाता है।

शनिवार को इस दिन सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा जबकि कन्या राशि में रहेगा। पूर्व दिशा और उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक, इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा करना अनिवार्य हो, तो कुछ विशेष ज्योतिषीय उपायों को अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।

--आईएएनएस

एसडी/एएस