नई दिल्ली, 30 जुलाई (आईएएनएस)। पाकिस्तान में तमाम कोशिश को बाद भी एचआईवी के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। रिपोर्ट में बताया गया कि पाकिस्तान को ऐसे 21 देशों में शामिल किया है, जहां एचआईवी को नियंत्रित करने में प्रगति होने के बावजूद नए संक्रमणों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
द न्यूज पाकिस्तान में प्रकाशित रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि फंडिंग में कटौती से देश में एचआईवी की स्थिति और खराब हो सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2010 से 2025 के बीच पाकिस्तान में नए एचआईवी संक्रमणों की संख्या में 20 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। पाकिस्तान को बांग्लादेश, अफगानिस्तान, ब्राजील, मिस्र और फिलीपींस जैसे देशों के साथ शामिल किया गया है, जहां एचआईवी महामारी अभी भी फैल रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 में फंडिंग में भारी कटौती के बाद एचआईवी के खिलाफ वैश्विक प्रयास एक नाजुक दौर में पहुंच गए हैं। इसके कारण कई निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रोकथाम कार्यक्रम, एचआईवी जांच, समुदाय आधारित सेवाएं और अन्य जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं।
इसके अलावा, एचआईवी कार्यक्रमों के लिए मिलने वाली बाहरी वित्तीय सहायता 2024 की तुलना में 18 प्रतिशत कम हो गई। इससे यह चिंता बढ़ गई है कि अगर सरकारें और अंतरराष्ट्रीय दानदाता दोबारा निवेश नहीं बढ़ाते, तो अब तक हासिल की गई प्रगति पीछे जा सकती है।
रिपोर्ट में बताया गया कि कई देशों ने घरेलू संसाधनों का उपयोग करके जीवनरक्षक एंटीरेट्रोवायरल उपचार जारी रखा है। लेकिन, एचआईवी रोकथाम कार्यक्रम अभी भी सबसे ज्यादा जोखिम में हैं, क्योंकि वे काफी हद तक बाहरी फंडिंग पर निर्भर रहते हैं।
यह चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब पाकिस्तान ग्लोबल फंड के लिए ग्रांट साइकिल आठ के तहत फंडिंग प्रस्ताव तैयार कर रहा है। देश एचआईवी संबंधी कार्यक्रमों के लिए पांच करोड़ डॉलर (50 मिलियन डॉलर) से अधिक की सहायता मांग रहा है। यह प्रस्ताव एचआईवी/एड्स, तपेदिक (टीबी) और मलेरिया से जुड़े व्यापक कार्यक्रम का हिस्सा है।
प्रस्तावित अनुदान का उपयोग एंटीरेट्रोवायरल उपचार, एचआईवी जांच, प्रयोगशालाओं को मजबूत बनाने, दवाइयों और जांच सामग्री की खरीद, रोग निगरानी, उच्च जोखिम वाले समूहों के लिए रोकथाम कार्यक्रमों और मां से बच्चे में एचआईवी संक्रमण रोकने के प्रयासों के लिए किया जाएगा।
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक दुनिया भर में लगभग 4.1 करोड़ लोग एचआईवी के साथ जीवन जी रहे थे। इसी वर्ष करीब 12 लाख लोगों में नया संक्रमण पाया गया, जबकि लगभग 5.7 लाख लोगों की मौत एड्स से जुड़ी बीमारियों के कारण हुई।
--आईएएनएस
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