पंकज त्रिपाठी ने 'क्रिमिनल जस्टिस 4' और 'मैं अटल हूं' को लेकर खोले राज, बोले- 'किरदार को समझना जरूरी है'

पंकज त्रिपाठी ने 'क्रिमिनल जस्टिस 4' और 'मैं अटल हूं' को लेकर खोले राज, बोले- 'किरदार को समझना जरूरी है'

मुंबई, 24 जुलाई (आईएएनएस)। अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने अपने करियर में कई यादगार किरदार निभाए हैं, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का किरदार उनके लिए सबसे चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में से एक रहा। फिल्म 'मैं अटल हूं' में उन्होंने देश के लोकप्रिय नेता के जीवन, विचारों और व्यक्तित्व को पर्दे पर उतारने की कोशिश की। इस किरदार को लेकर और लोकप्रिय वेब सीरीज 'क्रिमिनल जस्टिस' के नए सीजन को लेकर उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी।

दरअसल, पंकज त्रिपाठी अभिनेता शेखर सुमन के टॉक शो 'शेखर टुनाइट' में मेहमान बनकर आए थे। शो में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, ''किसी भी सीरीज की सफलता सिर्फ कलाकारों की वजह से नहीं होती, बल्कि इसके पीछे लेखक, शो रनर और पूरी क्रिएटिव टीम की मेहनत होती है।''

'क्रिमिनल जस्टिस 4' में वापसी को लेकर पंकज त्रिपाठी ने कहा, ''मैं इस सीजन को लेकर शुरुआत में थोड़ा सतर्क था। मैं किसी भी प्रोजेक्ट को सिर्फ इसलिए नहीं चुनता, क्योंकि वह पहले सफल रहा है। मेरे लिए कहानी में दम होना जरूरी है। जब मुझे इस सीजन की स्क्रिप्ट मिली तो मैंने पहले ही साफ कर दिया था कि अगर कहानी मुझे प्रभावित करेगी, तभी मैं इसका हिस्सा बनूंगा।''

पंकज त्रिपाठी ने कहा, ''मैंने अभी तक सिर्फ दो ही ऐसे शो किए हैं जो चौथे सीजन तक पहुंचे हैं, इनमें 'मिर्जापुर' और 'क्रिमिनल जस्टिस' शामिल हैं। जब मैंने 'क्रिमिनल जस्टिस 4' की स्क्रिप्ट पढ़ी, तो सच में वह बहुत शानदार थी और मुझे लगा कि यह अब तक के सभी सीजन से बेहतर है।''

बातचीत के दौरान पंकज त्रिपाठी ने अपनी अभिनय प्रक्रिया के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि वह किसी भी किरदार को निभाने से पहले उसकी तैयारी में काफी समय लगाते हैं। कैमरे के सामने आने के बाद वह किरदार को महसूस करने पर ध्यान देते हैं।

उन्होंने कहा, ''मैं अभिनय को लेकर बहुत सोचता हूं, लेकिन जब किरदार निभाने जाता हूं तो उस समय ज्यादा नहीं सोचता। अगर किरदार के लिए तैयारी मजबूत होगी तो उसे निभाना आसान हो जाता है।'' पंकज त्रिपाठी ने अपनी फिल्म 'मैं अटल हूं' में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का किरदार निभाने के अनुभव को भी याद किया।

उन्होंने कहा, ''मैंने अटल जी की बहुत सारी किताबें पढ़ीं और उनके पुराने भाषण देखे। मेरे लिए यह बहुत चुनौतीपूर्ण था क्योंकि मैं मिमिक्री में अच्छा नहीं हूं। मुझे डर था कि मैं अटल जी को कितना निभा पाऊंगा। हालांकि बाद में मुझे समझ आया कि किसी व्यक्ति की पहचान सिर्फ उसके बाहरी हाव-भाव से नहीं होती, बल्कि उसके विचार, उसकी बुद्धिमत्ता और उसके मूल्यों से होती है।''

--आईएएनएस

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