वेतनभोगी व्यक्ति टैक्स कैलकुलेशन में इन बातों का रखें ध्यान, समय पर रिफंड पाने में मदद मिलेगी

वेतनभोगी व्यक्ति टैक्स कैलकुलेशन में इन बातों का रखें ध्यान, समय पर रिफंड पाने में मदद मिलेगी

नई दिल्ली, 12 जून (आईएएनएस)। इनकम टैक्स में टैक्स कैलकुलेशन एक बड़ी जटिल प्रक्रिया है। कई बार देखा जाता है कि गलत टैक्स कैलकुलेशन के चलते वित्त वर्ष के आखिर में नियोक्ता आपके वेतन में अधिक टीडीएस (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) काट लेता है या फिर आपको इनकम टैक्स से डिमांड नोटिस का सामना करना पड़ सकता है।

ऐसे में वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सही टैक्स प्लानिंग के जरिए आसानी से भविष्य में होने वाली इन असुविधाओं को टाला जा सकता है।

लेकिन इसके लिए सबसे पहले हमें इनकम टैक्स रूल्स, 2026 के नियम 204 के तहत फॉर्म नंबर 122 और नियम 205 के तहत फॉर्म नंबर 124 को समझना होगा।

फॉर्म नंबर 122 नियोक्ताओं को कर्मचारियों का टीडीएस के सटीक आकलन में मदद करता है। इसके जरिए कर्मचारी पिछले या कई नियोक्ताओं से आय या वेतन, अन्य कर योग्य आय और अन्य कर योग्य आय पर काटे गए टीडीएस, किसी प्रेषण या भुगतान पर लिए गए टीसीएस की जानकारी अपने नियोक्ता को देता है।

वहीं, फॉर्म 124 के जरिए कर्मचारी हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) छूट, लीव ट्रैवल कंसेशन (एलटीसी), हाउस लोन पर ब्याज और वैध छूट के बारे में जानकारी अपने नियोक्ता को उपलब्ध करता है, ताकि टीडीएस काटने योग्य आय में से छूट हटा दिया जाए।

एक वेतनभोगी व्यक्ति को फॉर्म 122 में आने वाले घटकों की जानकारी समय-समय पर नियोक्ता को उपलब्ध कराती रहनी चाहिए। इससे उसका नया नियोक्ता आसानी से और सटीक टीडीएस का कैलकुलेशन कर पाएगा, क्योंकि इसमें अन्य सोर्स से आय को भी शामिल किया जाता है। इससे भविष्य में अचानक आने वाली टैक्स देनदारी को टाला जा सकता है।

इसके अलावा एक वेतनभोगी व्यक्ति को अपनी फॉर्म 124 में दिए गए घटकों के बारे में सही जानकारी अपने नियोक्ता को उपलब्ध करानी चाहिए। ध्यान रहे, किसी भी निवेश (छोटी बचत योजनाएं) या भुगतान (होम लोन पर ब्याज या एचआरए छूट) आदि को लेकर दावा करने के लिए आपके पास पर्याप्त प्रमाण होना चाहिए; अन्यथा, वित्त वर्ष के आखिरी तिमाही में आपको वेतन का एक बड़ा हिस्सा टीडीएस के रूप में कट सकता है।

एक वेतनभोगी कर्मचारी को एडवांस टैक्स की समय सीमा आने से पहले अपने टैक्स भुगतान के बारे में समीक्षा करनी चाहिए। इसके लिए फॉर्म 26एएस और एनुअल इन्फॉरमेशन स्टेटमेंट (एआईएस) का इस्तेमाल कर सकते हैं।

इससे आपको अचानक आने वाले टैक्स झटके और कम टैक्स भुगतान पर ब्याज से बचने में सकेंगे। साथ ही, समय पर रिफंड पाने में भी मदद मिलेगी।