नई दिल्ली: जल जीवन मिशन 2.0 के तहत ऑपरेशन और मेंटेनेंस (ओएंडएम) से जुड़े करीब 3 लाख करोड़ रुपए के अवसर उत्पन्न होने की संभावना है। मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब यह योजना केवल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पानी की सप्लाई को लंबे समय तक सही तरीके से चलाने और बनाए रखने पर फोकस करेगी।
आईसीआरए की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस मिशन का कुल बजट बढ़कर 8.69 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया है। साथ ही, अब इसे सर्विस-डिलीवरी मॉडल में बदला जा रहा है, जिससे इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) सेक्टर को फायदा मिलेगा।
रिपोर्ट के अनुसार, परियोजनाओं की समयसीमा बढ़ने और बजट बढ़ने से कंपनियों को भुगतान मिलने में सुधार होगा। फिलहाल कई राज्यों में भुगतान में 6 महीने से ज्यादा की देरी हो रही है, लेकिन सितंबर 2026 तक इसे घटाकर 60 दिन से कम करने का लक्ष्य है।
सरकार ने 19.4 करोड़ ग्रामीण परिवारों तक 100 प्रतिशत नल कनेक्शन पहुंचाने की समयसीमा 2024 से बढ़ाकर अब दिसंबर 2028 कर दी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पीवीसी और एचडीपीई पाइप बनाने वाली बड़ी और संगठित कंपनियों को इसका खास फायदा मिलेगा, क्योंकि अब गुणवत्ता, निरंतर सप्लाई और ऊर्जा दक्षता पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा।
इसके अलावा, जिन कंपनियों के पास मजबूत तकनीक और सर्विस नेटवर्क है, उन्हें इस बदलाव का ज्यादा लाभ मिलेगा।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 2025-26 के बाद बजट और वास्तविक खर्च में बड़ा अंतर देखने को मिला है, जिससे यह साफ होता है कि योजना के क्रियान्वयन में कुछ चुनौतियां हैं और अब सरकार टिकाऊ और बेहतर सेवा देने पर ज्यादा जोर दे रही है।
गौरतलब है कि जल जीवन मिशन (जेजेएम) की शुरुआत अगस्त 2019 में हुई थी, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक नल से साफ पानी पहुंचाना है।
इस योजना के तहत अब तक नल कनेक्शन वाले घरों की संख्या लगभग 5 गुना बढ़कर 323.6 लाख से 1,582.3 लाख हो गई है और फरवरी 2026 तक ग्रामीण कवरेज 81 प्रतिशत से ज्यादा हो चुका है।
हालांकि, इतनी बड़ी उपलब्धि के बावजूद कई जगहों पर पानी की गुणवत्ता और सप्लाई में कमी देखने को मिली, जिसके चलते अब सरकार ने इसे बेहतर सेवा देने वाले मॉडल में बदलने का फैसला किया है।
जल जीवन मिशन 2.0 के तहत अब पानी की नियमित सप्लाई, गुणवत्ता की निगरानी और डिजिटल सिस्टम (जैसे सुजलम भारत प्लेटफॉर्म) के जरिए निगरानी पर खास जोर दिया जाएगा।
साथ ही, इस योजना में ग्राम पंचायतों और स्थानीय संस्थाओं की भूमिका को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि ग्रामीण जल आपूर्ति को एक स्थायी सार्वजनिक सेवा के रूप में विकसित किया जा सके, न कि केवल एक बार बनने वाला प्रोजेक्ट।