नई दिल्ली, 9 जुलाई (आईएएनएस)। एआई डेटा सेंटर की दौड़ में भारत एक प्रमुख दावेदार बनकर उभरा है। ये सेंटर अगली पीढ़ी की कंप्यूटिंग को पावर देंगे। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन जैसी ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनियां और देश के बड़े बिजनेस ग्रुप, भारत में एआई के लिए डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए अरबों डॉलर का निवेश कर रहे हैं। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।
'द सिटीजन' की रिपोर्ट में बताया गया कि इसमें से ज्यादातर निवेश मुंबई और चेन्नई के आसपास केंद्रित है, जो कि अंडरसी (समुद्र के नीचे) केबल नेटवर्क के करीब मौजूद हैं और यह हाइपरस्केल डेटा सेंटर्स के लिए सबसे अच्छी जगह हैं। वहीं, देश के पूर्वीतट पर आंध्रप्रदेश का विशाखापट्टनम हब के रूप में उभर रहा है।
इन सुविधाओं के लिए बहुत अधिक बिजली और पानी की जरूरत होती है, ताकि खास तरह के और बहुत अधिक गर्मी पैदा करने वाले कंप्यूटिंग हार्डवेयर को ठंडा रखा जा सके। ये मजबूत पावर ग्रिड, ज्यादा क्षमता वाली फाइबर-ऑप्टिक कनेक्टिविटी और रिन्यूएबल एनर्जी तक बढ़ती पहुंच पर भी निर्भर करते हैं।
तेजी से उभरते हुए हब में विशाखापत्तनम भी शामिल है, जो दक्षिणी तटीय राज्य आंध्र प्रदेश का आर्थिक केंद्र है।
गूगल ने इस क्षेत्र में 15 अरब डॉलर निवेश करने का वादा किया है, जबकि अदाणी ग्रुप ने भी 2035 तक 5गीगावाट का एआई प्लेटफॉर्म बनाने के लिए 100 अरब डॉलर निवेश करने की योजना की घोषणा की है।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि हैदराबाद और पुणे जैसे अंदरूनी इलाकों के टेक्नोलॉजी सेंटर तेजी से अपने क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार कर रहे हैं, जिससे भारत की डिजिटल पहुंच तटीय इलाकों से आगे बढ़ रही है।
सरकार की सहयोगी पॉलिसी इन प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रही है। इसके तहत डेवलपर्स को रियायती दरों पर लंबे समय के लिए फाइनेंसिंग और टैक्स में बड़ी छूट दी जा रही है, जिसमें ग्रीन एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने वाली कंपनियों के लिए 2047 तक टैक्स हॉलिडे भी शामिल है।
हाइपरस्केल एआई प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश के कारण, अनुमान है कि इस दशक के आखिर तक भारत की ऑपरेशनल डेटा सेंटर क्षमता बढ़कर लगभग 6.5 गीगावाट हो जाएगी।
रिपोर्ट के अनुसार, भारी निवेश, सरकार की सहयोगी पॉलिसी और तेजी से बढ़ते डिजिटल इकोसिस्टम की बदौलत, देश दुनिया की प्रमुख एआई ताकतों में से एक बनने की राह पर है और ग्लोबल एआई कॉम्पिटिटिवनेस में सिर्फ अमेरिका और चीन से पीछे है।