मुंबई, 24 जुलाई (आईएएनएस)। भारत के निजी क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि जारी है और जुलाई में कंपोजिट पीएमआई 54.3 रहा है। यह जानकारी शुक्रवार को जारी हुए एचएसबीसी फ्लैश पीएमआई सर्वेक्षण में दी गई, जिसे एसएंडपी ग्लोबल द्वारा संकलित किया गया।
इससे पहले जून में कंपोजिट पीएमआई 57.1 रहा है। जुलाई में इसमें कमी दिखाती है कि निजी क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि की रफ्तार में कमी आई है। हालांकि, जब भी पीएमआई 50 से ऊपर होता है तो यह विस्तार को दिखाता है।
सर्वेक्षण में बताया गया कि कमजोर मांग, ऑर्डर रद्द होने और ग्राहकों की कम पूछताछ के कारण सर्विस सेक्टर में धीमी वृद्धि देखी गई। दूसरी ओर, मजबूत निर्यात मांग के कारण मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का विस्तार जारी रहा और लागत बढ़ने के दबाव के बावजूद कंपनियों ने नौकरियां देना जारी रखा।
एचएसबीसी की मुख्य इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा, "मध्य पूर्व में फिर से बढ़े तनाव के कारण कंपनियों ने आपूर्ति पक्ष के झटके के लंबे समय तक चलने से जुड़ी अनिश्चितताओं से निपटने के लिए बफर बनाना शुरू कर दिया है। खरीदारी की मात्रा बढ़ने के साथ-साथ तैयार माल और इनपुट इन्वेंट्री में भी बढ़ोतरी हुई है। हालांकि मैन्युफैक्चरिंग में कुल वृद्धि थोड़ी धीमी हुई, फिर भी आउटपुट और नए एक्सपोर्ट ऑर्डर दोनों में बढ़ोतरी देखी गई। कीमतों का दबाव बढ़ा है, आउटपुट चार्ज महंगाई में तेजी आई है और इससे मार्जिन बचाने की कोशिशें फिर से तेज होने का संकेत मिलता है।"
सर्वेक्षण के मुताबिक, नया बिजनेस जुलाई में बढ़ा है, हालांकि, इसकी गति कमजोर हुई है।
इस सुस्ती की मुख्य वजह सर्विस सेक्टर रहा। एचएसबीसी फ्लैश इंडिया सर्विस पीएमआई बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स जून में 57.4 से गिरकर 53.1 पर आ गया, जो पिछले 53 महीनों का सबसे निचला स्तर है, इसकी वजह कम मांग और ग्राहकों की तरफ से कम पूछताछ होना है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में स्थिति काफी हद तक स्थिर रही। मुख्य मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 54.2 से गिरकर 53.9 पर आ गया, जो चार महीनों का निचला स्तर है, जबकि मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट इंडेक्स 56.3 से बढ़कर 57.0 हो गया। इससे पता चलता है कि पूरे सेक्टर की वृद्धि में थोड़ी कमी के बावजूद फैक्ट्री प्रोडक्शन मजबूत होता रहा।
--आईएएनएस
एबीएस






