भारत के कंज्यूमर गुड्स सेक्टर की आय वृद्धि दर 2030 तक 17.3 प्रतिशत रहने का अनुमान

भारत के कंज्यूमर गुड्स सेक्टर की आय वृद्धि दर 2030 तक 17.3 प्रतिशत रहने का अनुमान

नई दिल्ली, 3 जुलाई (आईएएनएस)। कंज्यूमर गुड्स सेक्टर में वर्ष 2025-2030 की अवधि के दौरान आय 17.3 प्रतिशत चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ने की उम्मीद है। यह जानकारी शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।

ब्रिकवर्क रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, कंज्यूमर गुड्स सेक्टर में आय में तेज बढ़ोतरी की वजह क्रेडिट ग्रोथ, जीएसटी में कटौती, टियर-II और टियर-III शहरों से बढ़ी हुई मांग और प्रीमियम प्रोडक्ट्स की ओर झुकाव है।

वहीं, हेल्थकेयर सर्विस सेक्टर के लिए अच्छे संकेतकों में मजबूत रुचि और डेट कवरेज रेश्यो, लगभग 13 अरब डॉलर का मेडिकल टूरिज्म मार्केट और 70 साल से अधिक उम्र के बुज़ुर्गों के लिए आयुष्मान भारत प्रोग्राम का विस्तार शामिल है।

ब्रिकवर्क रेटिंग्स के रिसर्च हेड राजीव शरण ने कहा, "हमें उम्मीद है कि वित्त वर्ष 26 में मजबूत मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस गतिविधियों के दम पर जीडीपी वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत बनी रहेगी। वित्त वर्ष 27 के लिए वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।"

वित्त वर्ष 27 में महंगाई दर लगभग 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, हालांकि, भू-राजनीतिक जोखिम और अल नीनो पर नजर रखना जरूरी है।

रिपोर्ट में वित्त वर्ष 27 में अपने 25 रेटेड सेक्टरों में से 22 के लिए स्थिर क्रेडिट आउटलुक का अनुमान लगाया गया है। इसे मजबूत घरेलू मांग, सरकार के लगातार कैपिटल खर्च, अच्छी बैलेंस शीट, बेहतर ऑपरेटिंग मार्जिन और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताओं के बावजूद अनुमानित कैश फ्लो का समर्थन मिला है।

टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, टेलीकॉम, इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स, इंडस्ट्रियल और पावर जेनरेशन सेक्टर को डी-लीवरेजिंग (कर्ज कम करने), पॉलिसी सपोर्ट, नए ट्रेड एग्रीमेंट के तहत निर्यात के मौकों और लंबे समय तक मांग की संभावनाओं से फायदा मिलता है।

ब्रिकवर्क रेटिंग्स के चीफ रेटिंग्स ऑफिसर, के. एच. पटनायक ने कहा, "हालांकि केमिकल और टेक्सटाइल जैसे सेक्टर मार्जिन के दबाव का सामना कर रहे हैं, और ट्रांसपोर्ट व एयरपोर्ट पर अभी भी काफी कर्ज है, फिर भी उनकी क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत सॉल्वेंसी, बेहतर होती प्रॉफिटेबिलिटी और स्थिर रेवेन्यू की संभावनाओं से समर्थित है।"

8 इंडस्ट्री क्लस्टर के 25 सेक्टर में से, रेटिंग एजेंसी ने पावर डिस्ट्रीब्यूशन सेगमेंट को 'नेगेटिव-टू-स्टेबल' रेटिंग दी है।

वहीं, रेटिंग एजेंसी का मानना ​​है कि भारत का मैक्रोइकॉनॉमिक माहौल मजबूत बना हुआ है, जो भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद क्रेडिट क्वालिटी के लिए एक सहायक आधार प्रदान करता है।

--आईएएनएस

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