लंदन/नई दिल्ली, 27 जून (आईएएनएस)। अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) के कार्यकारी निदेशक सागर अदाणी ने कहा है कि अदाणी ग्रुप दुनिया के सबसे बड़े नवीकरणीय ऊर्जा पोर्टफोलियो में से एक तैयार कर रहा है। इसके लिए समूह ने वर्ष 2030 तक 50 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता और 2035 तक 10 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है।
लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक के दौरान लंदन के साइंस म्यूजियम में अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) और एनर्जी ट्रांजिशन्स कमीशन (ईटीसी) की साझेदारी में आयोजित पहले अदाणी ग्रीन एनर्जी डायलॉग में बोलते हुए उन्होंने कहा कि हम पंप्ड हाइड्रो और यूटिलिटी-स्केल बैटरी सहित बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं में निवेश कर रहे हैं। साथ ही देश भर में कुशलतापूर्वक बिजली वितरण के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं और हरित हाइड्रोजन इकोसिस्टम विकसित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, "हम यह सब ऐसे पैमाने और गति से कर रहे हैं, जैसा दुनिया ने शायद ही कभी देखा हो। क्योंकि छोटे-छोटे बदलाव अब पर्याप्त नहीं होंगे।"
सागर अदाणी ने कहा कि पिछले तीन महीनों की घटनाओं ने दुनिया के हर देश को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
उन्होंने कहा कि आज विकसित और विकासशील दोनों देशों को अपनी अर्थव्यवस्था को लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक संकटों से सुरक्षित रखने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, विकासशील देशों में करोड़ों लोग मध्यम वर्ग में शामिल हो रहे हैं और बेहतर जीवन के लिए उनकी ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराना एक बुनियादी आवश्यकता बन गया है।
सागर अदाणी ने कहा कि लगातार बढ़ रहे वैश्विक तनावों ने ऊर्जा की जरूरत को अब अस्तित्व की लड़ाई बना दिया है।
उन्होंने कहा, "ऊर्जा सुरक्षा, ऊर्जा की किफायती उपलब्धता और टिकाऊ ऊर्जा - यही आज दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती है।"
उन्होंने कहा कि भारत में विद्युतीकरण की जरूरत सबसे अधिक है और यह सबसे चुनौतीपूर्ण भी है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में भारत ने कोयला, तेल, गैस, परमाणु ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा सहित सभी स्रोतों से मिलाकर करीब 10,000 टेरावाट-घंटे ऊर्जा की खपत की।
सागर अदाणी ने कहा कि भारत की चुनौती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अगले दो दशकों में देश को लगभग 2,000 गीगावाट नई बिजली उत्पादन क्षमता जोड़नी होगी।
उन्होंने कहा कि यह क्षमता ऐसी होनी चाहिए जो सस्ती, सभी तक पहुंचने वाली और अधिक से अधिक स्वच्छ ऊर्जा पर आधारित हो। यही भारत के सामने सबसे बड़ा अवसर और सबसे बड़ी चुनौती है।
उन्होंने कहा कि भारत के लिए आगे का रास्ता पूरी तरह स्पष्ट है। भारत को हर क्षेत्र में तेजी से विद्युतीकरण करना होगा, ताकि आयातित ऊर्जा पर निर्भरता कम हो सके। देश को ऐसी ऊर्जा व्यवस्था तैयार करनी होगी, जो घरेलू संसाधनों पर आधारित हो।
उन्होंने कहा कि इसके लिए व्यावहारिक सोच अपनानी होगी और नवीकरणीय ऊर्जा, जलविद्युत, आधुनिक तापीय ऊर्जा तथा परमाणु ऊर्जा जैसे सभी उपलब्ध स्रोतों का उपयोग करना होगा।
सागर अदाणी ने कहा, "मजबूत और बड़े पैमाने पर उपलब्ध बेसलोड बिजली के बिना यह लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं है।"
उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारत सरकार के नेतृत्व ने अनावश्यक नियमों और लालफीताशाही को कम करने, सार्वजनिक उपक्रमों को मजबूत करने और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने का महत्वपूर्ण काम किया है।
उन्होंने आगे कहा कि सरकार की कई बड़ी और छोटी नीतिगत पहलों ने ऐसा माहौल तैयार किया है, जहां उद्योग तेजी से आगे बढ़ सकते हैं। बुनियादी ढांचे का विकास, नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का विस्तार, ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करना और दीर्घकालिक निवेश को बढ़ावा देना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम रहे हैं।
सागर अदाणी ने कहा, "सरकार की नीतियों में स्पष्टता और निरंतरता ने भारत की ऊर्जा व्यवस्था को अधिक मजबूत और लचीला बनाने में अहम भूमिका निभाई है।"
--आईएएनएस
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