लेखक- सनत जैन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों सारे देश और दुनिया में चर्चा का विषय बने हुए हैं। ट्रंप जिस तरह से अमेरिका की नीतियों और यूरोपीय देशों की उपेक्षा करते हुए अपने व्यापारिक उद्देश्य को पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं, उसके कारण अमेरिका और यूरोप के देशों में ट्रंप के खिलाफ रोष देखने को मिल रहा है। जिसका व्यापक असर अमेरिका के राज्यों और यूरोपीय देशों के बीच दिखना शुरू हो गया है। ट्रंप ने जिस तरह का व्यवहार यूक्रेन के राष्ट्रपति के साथ किया है, उसे यूरोप और नाटो देशों ने पसंद नहीं किया। अमेरिका से जेलेंसकी के लंदन लौटने के बाद ब्रिटेन में 27 देशों के प्रतिनिधि यूक्रेन के समर्थन में होने वाली बैठक में शामिल हुए। सभी देशों ने मिलकर युद्धग्रस्त यूक्रेन की सहायता करने के लिए 40000 करोड़ रुपए की तुरंत सहायता यूक्रेन को देने की घोषणा की। यूरोप और नाटो संगठन के देशों में प्रतिबंध के बाद रूस के लगभग 40000 करोड रुपए यूरोपीय देशों के पास जमा थे। उस पैसे को तुरंत यूक्रेन को मदद के रूप में देने का फैसला यूरोप के देशों ने किया। इसे एक ऐतिहासिक फैसला माना जा सकता है। यूरोप को अपनी सुरक्षा के लिए ऐसा निर्णय लेना पड़ा। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध रोकने के लिए जिस तरह से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक तरफा शर्तें यूक्रेन के ऊपर लाद रहे थे, नाटो देशों को शांतिवार्ता में शामिल नहीं कर रहे थे, उसकी बड़ी तीव्र प्रतिक्रिया अंतरराष्ट्रीय जगत में देखने को मिली है। यूरोप के देश चाहते हैं, शांति प्रयासों में अमेरिका के साथ यूरोप के देशों को भी शामिल किया जाए। लंदन समिट में यूरोप के 44 देश के 24 नेता व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए थे। जो इस बात को पुख्ता करते हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा रूस और यूक्रेन के बीच में जो शांति स्थापित करने की कोशिश की जा रही है, उसके लिए जो शांति प्रस्ताव तैयार कर गुंडागर्दी की जा रही है, वह उसका विरोध करते हैं। पोलैंड के प्रधानमंत्री ने यहां तक कह दिया, 50 करोड़ यूरोपीय नागरिकों को हम अमेरिका के भरोसे नहीं छोड़ सकते हैं। 14 करोड़ रुसी, 50 करोड़ यूरोपीय नागरिकों पर जबरदस्ती नहीं कर सकते हैं। यूरोप के 44 देशों ने एकमत से प्रस्ताव पास किया है। वह रूस और अमेरिका के सामने सरेंडर नहीं करेंगे। अपनी लड़ाई खुद लड़ने में सक्षम हैं। यूरोप के देशों में रूस से ज्यादा गुस्सा अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर है। अमेरिका यूक्रेन और नाटो देशों के साथ जो समझौता हुआ था, उस समझौते से अमेरिका मुकर रहा है। जिसके कारण अब यूरोप के देश संगठित होकर यूक्रेन के साथ खड़े हो गए हैं। वैश्विक स्तर पर जो घटना देखने को मिल रही है। उसके बाद यही कहा जा सकता है, कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जल्द ही यूरोप और नाटो देशों के साथ वार्ता नहीं की, तो अमेरिका पूरी तरह से अलग-थलग पड़ सकता है। पिछले दो माह में जिस तरह के निर्णय अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लिए हैं, उसके कारण अमेरिका के राज्यों में भी डोनाल्ड ट्रंप के प्रति विद्रोह शुरू हो गया है। एलन मस्क के खिलाफ अमेरिका में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। उप राष्ट्रपति बेंस के खिलाफ भी आंदोलन प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। ऐसी स्थिति में डोनाल्ड ट्रंप की राजनीतिक एवं प्रशासनिक स्थिति अमेरिका में कमजोर हो रही है। अमेरिका में यह आमराय बनती चली जा रही है, डोनाल्ड ट्रंप अपने मित्र एलन मस्क के साथ मिलकर व्यापारिक एजेंडा पूरा कर रहे हैं। जिसके कारण अमेरिकी हितों को नुकसान हो रहा है। ट्रंप ने जिस तरह से क्रिप्टो करेंसी को बढ़ावा देना शुरू किया है। उन्होंने खुद की क्रिप्टो केरंसी जारी की है। जिसके कारण अमेरिकी डॉलर के ऊपर सबसे ज्यादा प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं। दुनिया भर के देश डॉलर का विकल्प ढूंढ रहे हैं। ऐसी स्थिति में आने वाले समय में अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप के लिए मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। यही कहा जा सकता है।