इन्दौर: मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर की कोर्ट ने विभिन्न सरकारी विभागों में हाल ही में की गई दिव्यागों की भर्ती मामले में यह मानते हुए कि भर्ती प्रक्रिया में नियमों का पूरी तरह से पालन नहीं किया जा रहा है। ज्यादा दिव्यांगता वाले नौकरी के पहले हकदार हैं, लेकिन उन्हें दरकिनार करते हुए आंशिक दिव्यांगों को नौकरी दी जा रही है, कौशल विकास विभाग मप्र, नगर पालिका कन्नौद तथा नगर पालिका जावरा द्वारा दिव्यांगजन के विशेष भर्ती अभियान के तहत जारी विज्ञापन और इसके आधार पर की गई नियुक्तियों को निरस्त कर दिया है। याचिकाकर्ता की और से पैरवी करते एडवोकेट एडवोकेट शन्नो शगुफ्ता खान ने कोर्ट के समक्ष सुनवाई के दौरान तर्क रखा कि जिस तरह से आंशिक दिव्यांगता वालों को प्राथमिकता दी जा रही है, उस हिसाब से शत-प्रतिशत दिव्यांगता वाले तो कभी शासकीय नौकरी प्राप्त ही नहीं कर सकेंगे। जिस पर कोर्ट ने सहमत हो भर्ती और विज्ञापन पर उक्त रोक लगाई । एडवोकेट शन्नो शगुफ्ता खान के अनुसार प्रकरण कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि कौशल विकास विभाग ने चतुर्थ श्रेणी के 30 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसमें न्यूनतम 40 प्रतिशत दिव्यांगता वाले आवेदन करने के लिए पात्र थे। वहीं नगर पालिका कन्नौद और नगर पालिका जावरा ने भी ऐसे ही भर्ती विज्ञापन जारी किये थे जिन पर शत-प्रतिशत दिव्यांगता वालों ने भी आवेदन किया था, लेकिन नियुक्ति में शत-प्रतिशत दिव्यांगता वालों को दरकिनार करते हुए आंशिक रूप से दिव्यांगता वालों को उनकी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर नियुक्तियां दी जा रही थीं। एडवोकेट खान ने बताया कि हमने शत-प्रतिशत दिव्यांगता वालों की अनदेखी का मुद्दा उठाते हुए अलग-अलग याचिकाएं हाई कोर्ट में दायर की थीं। जिन पर एक साथ सुनवाई करते कोर्ट ने माना कि भर्ती प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया और कौशल विकास विभाग, नगर पालिका कन्नौद व जावरा के उक्त विज्ञापन निरस्त करते हुए दोबारा भर्ती जारी करने के आदेश दिए।