हरिद्वार: जीवन विद्या के आलोक केन्द्र देवसंस्कृति विवि अपने अभिनव शैक्षणिक पाठ्यक्रम के लिए युवाओं में आकर्षण का केन्द्र बना है। यहाँ समय समय पर देश के अनेक राज्यों के विद्यार्थी शैक्षणिक भ्रमण के लिए पहुंचते हैं। इसी क्रम में संस्कृत महाविद्यालय रायपुर (छग) से 25 एवं नेपाल से 50 युवाओं का दल शांतिकुंज, देसंविवि पहुंचा है। अपनी यात्रा के दौरान देवसंस्कृति विवि के प्रतिकुलपति युवा आइकान डॉ. चिन्मय पण्ड्या से भेंट की और जीवन में सफल होने के विविध सूत्र पाये। इस अवसर पर युवा आइकान ने छात्रों के साथ शिक्षा, संस्कृति और समाज निर्माण में सक्रियता के साथ भारतीय संस्कृति और संस्कारों का वाहक बनने के लिए प्रेरित किया। अपनी शैक्षणिक यात्र के दौरान सद्ज्ञान और सकारात्मक दृष्टिकोण को समृद्ध किया, साथ ही उन्होंने भारत की समृद्ध आध्यात्मिक धरोहर से जुड़े के लिए कदम बढ़ाया। वे सभी विश्वविद्यालय स्थित प्रज्ञेश्वर महादेव मंदिर की दिव्यता एवं विवि की भव्यता के साथ आध्यात्मिक व शैक्षणिक वातावरण से काफी प्रभावित हुए। नेपाल के 25 अलग अलग स्थानों से आये युवाओं ने शांतिकुंज में साधना शिविर में भी प्रतिभाग किया और सभी सदस्यों ने गहन आध्यात्मिक अभ्यास और जीवन के उच्च आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। साधना के दौरान उन्होंने शांतिकुंज की पवित्रता और दिव्यता का अनुभव किया, जिससे उनके आंतरिक विकास और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा मिली।