न्यूयॉर्क: अमेरिकी शोधकर्ताओं का कहना है कि बढती उम्र में शरीर की ऊर्जा क्षमता को ब्राउन फैट न केवल बढ़ाता है, बल्कि दीर्घायु होने में भी सहायक हो सकता है। उम्र बढ़ने के साथ शारीरिक रूप से फिट रहने की चुनौती से जूझ रहे लोगों के लिए एक नई खोज उम्मीद जगा सकती है। यह अध्ययन रटगर्स यूनिवर्सिटी के न्यू जर्सी मेडिकल स्कूल की टीम द्वारा किया गया, जिसमें ब्राउन फैट की भूमिका और इसकी संभावनाओं पर प्रकाश डाला गया। अध्ययन में यह पाया गया कि एक विशेष जीन की कमी वाले चूहों ने ब्राउन फैट का अत्यधिक सक्रिय रूप विकसित किया, जिससे उनकी जीवन प्रत्याशा में वृद्धि हुई और उनकी कार्य क्षमता में लगभग 30 प्रतिशत का सुधार हुआ। इस खोज के आधार पर, वैज्ञानिक एक ऐसी दवा विकसित करने पर काम कर रहे हैं, जो मनुष्यों में भी इसी तरह के प्रभाव पैदा कर सके। रटगर्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और इस अध्ययन के वरिष्ठ लेखक स्टीफन वैटनर ने कहा, जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, कार्य क्षमता में गिरावट आती है। अगर इसे बढ़ाने का कोई तरीका मिल जाए, तो स्वस्थ उम्र बढ़ने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। उन्होंने यह भी बताया कि अध्ययन के दौरान आनुवंशिक रूप से संशोधित चूहे अपने सामान्य साथियों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहे थे। ब्राउन फैट को सफेद वसा के विपरीत कैलोरी जलाने और शरीर के तापमान को नियंत्रित करने के लिए जाना जाता है। इस शोध से यह भी पता चला कि ब्राउन फैट मांसपेशियों में रक्त प्रवाह को बढ़ाकर व्यायाम क्षमता में सुधार करता है। अध्ययन के दौरान चूहों में देखा गया कि जिनमें आरजीएस14 नामक प्रोटीन की कमी थी, वे सामान्य चूहों की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत अधिक जीवित रहे। दिलचस्प बात यह रही कि मादा चूहे नर की तुलना में अधिक समय तक जीवित रहीं, जो मानव जीवन शैली से मेल खाता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस खोज से भविष्य में ऐसी दवाओं का विकास संभव हो सकता है, जो न केवल उम्र बढ़ाने में सहायक होंगी, बल्कि लोगों को लंबे समय तक स्वस्थ और सक्रिय बनाए रखने में भी मदद करेंगी। प्रोफेसर वैटनर ने कहा, हालांकि चिकित्सा प्रगति के कारण मनुष्य की औसत आयु बढ़ रही है, लेकिन स्वस्थ उम्र बढ़ने पर विशेष ध्यान नहीं दिया गया है।



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