नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर दिल्ली यूपी सहित कई राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है जिसमें याचिकाकर्ता ने कहा है कि नालसा कंपेनसेशन स्कीम का सभी राज्य अनुपालन करें। स्कीम के तहत सेक्सुअल असॉल्ट के पीड़ित को मुआवजा देने की व्यवस्था है। नेशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी (नालसा) ने सेक्सुअल असॉल्ट पीड़ित को मुआवजा देने के लिए स्कीम बना रखी है।
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच के सामने सोशल एक्शन फोरम (एसएएफ) की ओर से अर्जी दाखिल कर कहा गया है कि सभी राज्यों को नालसा कंपेनसेशन स्कीम का अनुपालन करना चाहिए। याचिकाकर्ता ने कहा कि 2018 में नालसा कंपेनसेशन स्कीम फॉर वूमेन पीड़ित/सर्वाइवर्स ऑफ सेक्सुअल असॉल्ट क्राइम बनाया गया था इसके तहत मुआवजा देने की बात है।
याचिकाकर्ता के वकील ज्योतिका कालरा की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि 21 सेक्सुअल अपराध की पीड़ित की लिस्ट है जो याचिका का हिस्सा हैं। याचिकाकर्ता ने कहा कि नालसा की इस लेकर स्कीम है जिसके तहत कहा गया है कि कंपेनसेशन क्या होगा और कितना होगा साथ ही यह भी कहा गया है कि न्यूनतम मुआवजा रकम पांच लाख होगा। याचिकाकर्ता ने कहा कि यूपी में अधिकतम मुआवजे की रकम तीन लाख ही है। साथ ही कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही नितिन सक्सेना मामले में कहा था कि स्कीम को सही भावना के साथ लागू किया जाए। याचिकाकर्ता ने कहा कि मामले में वह चार राज्यों को पक्षकार के तौर पर शामिल कर रही हैं इसमें यूपी दिल्ली मध्य प्रदेश और बिहार शामिल है। चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ की बेंच ने मामले में नोटिस जारी कर कहा कि अभी वह इन्हीं राज्यों को नोटिस जारी करते हैं और बाद में इस विस्तार दिया जा सकता है।