पटना: बिहार की राजनीति में फिर भूचाल के संकेत मिल रहे हैं। इसकी वजह भी नीतीश कुमार हैं। दरअसल नीतीश ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रशंसा में ऐसा कुछ कह दिया जिससे कई सवाल उठने लगे। लोग कहने लगे हैं कि क्या फिर पलटी मरने वाले हैं। कोई बीजेपी से नजदीकियों की बात कर रहे हैं। आरजेडी सहित तमाम विपक्षी दल सकते में हैं और नीतीश कुमार के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं।
सीएम नीतीश ने कहा कि पूर्व पीएम वाजपेयी के प्रति उनके मन में जो श्रद्धा का भाव है उसे वह जीवन भर नहीं भूल सकते। पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी की जयंती पर रविवार को मुख्यमंत्री ने कहा कि वहां मुझे काफी मानते थे। अटल जी के नेतृत्व में काम करने का मुझे मौका मिला। उन्होंने जिस तरह से देश के विकास के लिए काम किया उसका मेरा अपना अनुभव है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक सांसद के रूप में भी उनके काम को देखते रहते थे। उनकी बात सुनते थे। बाद में तब उनके साथ काम करने का मौका मिला। उन्होंने मुझे तीन तरह के विभाग का काम सौंपा। हमारे सभी प्रस्ताव को वह मानते थे। कितना काम उन्होंने करवाया। हम लोगों ने यह सोचा कि उनके जन्मदिवस पर राजकीय समारोह का आयोजन किया जाए।
दरअसल नीतीश ने पूर्व पीएम वाजपेयी की प्रशंसा क्या कर दी विपक्षी राजनीति में एक संशय के बादल गहराने लगे। आरजेडी के भीतर तब उसी दिन से अंतर्विरोध की राजनीति गहरी हो गई थी जब नीतीश ने तेजस्वी की ताजपोशी की घोषणा करते यह कह डाला था कि वहां 2025 विधानसभा चुनाव का नेतृत्व करने वालें हैं। वहीं राजद के भीतर यह चल रहा था कि 2023 में सत्ता सौंप कर नीतीश विपक्षी एकता की मुहिम में निकल जाएंगे। हालांकि उनकी घोषणा के बाद ही जगदानंद सिंह ने संकेतों में नीतीश कुमार को इशारा भी किया था कि बड़ी भूमिका स्वीकार करें और उस मुहिम के लिए निकल जाएं। परंतु ऐसा हुआ नहीं।
वहीं प्रशांत किशोर ने फिर नीतीश के स्वभाव की चर्चा करते हुए कहा कि कोई अतिश्योक्ति नहीं होगा कि नीतीश कुमार का मूड बदल सकता है। वे आरजेडी के साथ गठबंधन तोड़कर दोबारा बीजेपी का रुख कर सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि बतौर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के जरिए एक सिरा अभी भी बीजेपी से जुड़ा है।