गुरुग्राम: हरियाणा के मंत्री अनिल विज, जिन्हें मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राज्य इकाई के प्रमुख मोहन लाल बडौली पर निशाना साधने के लिए भारतीय जनता पार्टी द्वारा कारण बताओ नोटिस दिया गया था, उन्होंने जवाब देते हुए पूछा है कि इसे किसने “लीक” किया. उन्होंने पिछले साल के विधानसभा चुनावों में उन्हें हराने के वास्ते “साजिश” रचने का भी आरोप लगाया. दिप्रिंट को इस बारे में जानकारी मिली है. यह नोटिस विज को, जो राज्य के ऊर्जा, परिवहन और श्रम मंत्री हैं, बडौली ने 10 फरवरी को दिया था. मामले से जुड़े सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि विज ने कई अन्य आरोप लगाए हैं, जिनमें उनकी जान को खतरे में डालने की साजिश और मंत्री के तौर पर उनके आदेशों का पालन न करके उन्हें अपमानित करने का प्रयास शामिल है. बडौली ने विज को उनके और सीएम सैनी के खिलाफ कई बयानों के साथ “पार्टी की छवि खराब करने” के लिए कारण बताओ नोटिस दिया था. विज को नोटिस के तीन दिनों के भीतर अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा गया था. बुधवार को अंबाला में पत्रकारों से बात करते हुए विज ने कहा कि वे पिछले तीन दिनों से बेंगलुरु में हैं और मीडिया के ज़रिए से उन्हें नोटिस के बारे में पता चला है. हालांकि, उन्होंने अपने जवाब का ब्योरा देने से इनकार कर दिया. दिप्रिंट द्वारा संपर्क किए जाने पर उन्होंने पुष्टि की कि उन्होंने विस्तृत जवाब दिया है, लेकिन साथ ही कहा कि जवाब की विषय-वस्तु का खुलासा नहीं किया जा सकता क्योंकि यह उनके और उनकी पार्टी के बीच का मामला है. यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने अपना जवाब बडौली या भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को भेजा है, विज ने कहा कि चूंकि बडौली ने उन्हें कारण बताओ नोटिस दिया है, इसलिए जवाब उन्हीं को संबोधित है. उन्होंने कहा, “हालांकि, एक प्रति राष्ट्रीय अध्यक्ष को भी भेजी गई है क्योंकि प्रदेश अध्यक्ष ने नोटिस में जेपी नड्डा का ज़िक्र किया था.” हालांकि, विज के करीबी सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि मंत्री का जवाब काफी तीखा है और उन्होंने अपने जवाब में कई मुद्दे उठाए हैं, जिनका जवाब देना पार्टी के लिए मुश्किल हो सकता है. सूत्रों के अनुसार, विज ने भाजपा के शीर्ष नेताओं को बताया है कि चुनाव से पहले यह ‘झूठा नैरेटिव’ फैलाया गया कि उन्हें पार्टी का टिकट नहीं मिलेगा. टिकट मिलने के बाद भी यह अफवाह फैली कि वे जीत नहीं पाएंगे और अगर जीत भी गए तो सरकार का हिस्सा नहीं बनेंगे. उन्होंने दावा किया है कि कुछ भाजपा नेताओं ने उनके प्रतिद्वंद्वियों के साथ मिलकर उनकी चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की. सूत्रों ने आगे बताया कि विज ने अपने जवाब में यह भी आरोप लगाया है कि टिकट मिलने के बाद चुनाव प्रचार के दौरान उनकी जान को खतरा रहा. उन्होंने दावा किया कि उनकी जान को खतरे के बारे में स्पष्ट खुफिया जानकारी के बावजूद कुछ पार्टी सदस्यों और कुछ प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी सुरक्षा कम करने में मिलीभगत की. जानकारी मिली है कि विज ने दावा किया है कि उन्हें हराने के लिए उनके निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्य जानबूझकर रोके गए और मतदाताओं को उनके खिलाफ करने के लिए नगर निगम द्वारा स्वीकृत सड़क परियोजनाओं को रोक दिया गया. उन्होंने कथित तौर पर तर्क दिया है कि यह उनके चुनाव अभियान में बाधा डालने की एक जानबूझकर की गई साजिश थी. मंत्री ने यह भी दावा किया है कि उन्होंने सीएम सैनी और बडौली को स्थिति के बारे में बार-बार सूचित किया था और उन्हें आश्वासन दिया गया था कि जांच की जाएगी और कार्रवाई की जाएगी. हालांकि, उनकी शिकायतों के 100 दिन बाद भी कुछ नहीं हुआ. विज ने आगे दावा किया कि उनके अधिकार को कमतर आंका जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि एक सार्वजनिक सुनवाई के दौरान, उन्होंने अंबाला कैंट सदर थाने के एसएचओ को निलंबित करने का आदेश दिया था, लेकिन उनके आदेश की अनदेखी की गई. पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को सूचित करने के बावजूद, निलंबन अनुरोध को राज्य के गृह मंत्रालय ने खारिज कर दिया, जो सैनी के अधीन है. उन्होंने दावा किया कि उनके अधिकार की इस सार्वजनिक अवहेलना ने उनकी राजनीतिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया. भाजपा नेता ने अंबाला जिले के पार्टी कोषाध्यक्ष आशीष तायल पर उनके खिलाफ चुनाव लड़ने वाली निर्दलीय उम्मीदवार चित्रा सरवारा का सक्रिय रूप से समर्थन करने का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि उन्होंने विपक्षी नेताओं के साथ मिलकर तायल के प्रचार करने के वीडियो सबूत उपलब्ध कराए हैं, लेकिन आरोप लगाया कि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई. पिछले हफ्ते, भाजपा ने विज को खुश करने के लिए तायल को अंबाला जिले के कोषाध्यक्ष के पद से हटा दिया. विज ने यह भी सवाल उठाया कि उन्हें जारी किया गया कारण बताओ नोटिस मीडिया में कैसे लीक हो गया. अपने जवाब में उन्होंने स्पष्ट रूप से मांग की है कि गोपनीयता के इस उल्लंघन की जांच की जाए. हरियाणा के मंत्री पिछले महीने से अपनी ही सरकार पर हमला कर रहे हैं. उन्होंने सबसे पहले घोषणा की कि वे अंबाला में अपने जनता दरबार और कैथल तथा सिरसा में अपनी आधिकारिक जिला शिकायत समितियों की बैठकें बंद कर रहे हैं क्योंकि अधिकारी उनके आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं. बाद में, उन्होंने हिमाचल प्रदेश में सामूहिक बलात्कार के एक मामले में आरोपी बडौली से कहा कि जब तक वे निर्दोष साबित नहीं हो जाते, वे पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दें. हिमाचल प्रदेश पुलिस ने तब से मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है. कुछ दिनों बाद, विज ने सैनी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब से वे सीएम बने हैं, वे लगातार अपने ‘उड़न खटोला’ पर उड़ रहे हैं और उन्हें लोगों की शिकायतें सुनने के लिए नीचे आना चाहिए. इस बीच, विज कारण बताओ नोटिस मिलने के बावजूद एक्शन मोड में हैं. उन्होंने हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड (एचवीपीएनएल) के मुख्य अभियंता अनिल कुमार को निलंबित कर दिया है और उनका तबादला पंचकूला मुख्यालय में कर दिया है. गुरुवार को, विज ने कहा कि उन्हें गुरुग्राम के सेक्टर 107 में एक सबस्टेशन में 9 फरवरी को आग लगने की घटना के बारे में सूचना मिली थी. आग लगने से करीब 22 रिहायशी सोसायटियों और अन्य इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई. घटना की सूचना अपने वरिष्ठ अधिकारियों को न देने के कारण अनिल कुमार के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई.