लेखक- सनत जैन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव के समय घोषणा की थी- क्रिप्टो स्ट्रैटेजिक रिजर्व स्थापित करेंगे। इसमें दुनिया भर में जितने भी क्रिप्टो करेंसी के प्लेटफार्म हैं, उन्हें शामिल किया जाएगा। क्रिप्टो रिजर्व में बिटकॉइन, एथेरियम, एक्सआरपी सोलना और एडीए क्रिप्टो करेंसी शामिल हैं। अमेरिका के इस फैसले से दुनिया भर में डॉलर और शेयर बाजार मे इसका असर देखने को मिलेगा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की वित्तीय प्रणाली को मजबूत करने के लिए डिजिटल करेंसी को बढ़ावा देने का अभियान शुरू किया है। आर्थिक मंदी से निपटने के लिए उन्होंने इसे एक विकल्प बताना शुरू कर दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है, इससे डॉलर की स्थिरता बढ़ेगी। बडबोले ट्रंप ने कहा, वह अमेरिका को क्रिप्टो राजधानी बनाकर रहेंगे। शुक्रवार को व्हाइट हाउस में क्रिप्टो करेंसी का शिखर सम्मेलन होने जा रहा है। सोलना का प्लेटफार्म ट्रम्प द्वारा शुरू क़ी गई ट्रंप कॉइन सहित अन्य क्रिप्टो करेंसी को संचालित करता है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस निर्णय के बाद क्रिप्टो करेंसी में लगभग 62 फीसदी की तेजी देखने को मिली है। ट्रंप के निर्देशानुसार अमेरिका की ट्रेजरीएक्सचेंज स्थिरीकरण के लिए मानदंड तैयार कर रही है। इसके जरिए क्रिप्टो करेंसी के रिज़र्व और डॉलर रिजर्व के बीच में संतुलन बनाने की बात कही जा रही है। ट्रंप की इस घोषणा के बाद कारडोनों क्रिप्टो करेंसी में 62 फ़ीसदी का उछाल आया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप क्रिप्टो करेंसी का जो खेल, खेल रहे हैं इसका असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर पड़ना तय माना जा रहा है। इसके अलावा डॉलर मुद्रा जो अभी तक वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य मुद्रा थी, उस पर भी विपरीत असर पड़ना तय माना जा रहा है। ट्रम्प क्रिप्टो करेंसी को वैश्विक कारोबार के लिए डॉलर के समानांतर खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। क्रिप्टो करेंसी से वैश्विक कारोबार करने की बात कही जा रही है। अमेरिका की अर्थव्यवस्था गड़बड़ा रही है। इसको देखते हुए अमेरिक़ी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका से ज्यादा अपने निजी कारोबारी हितों को ध्यान में रखते हुए क्रिप्टो करेंसी को बढ़ावा देने की शुरुआत की है। ट्रंप का यह आखिरी कार्यकाल है। इसका वह भरपूर फायदा उठा लेना चाहते हैं। राष्ट्रपति बनने के पहले ट्रंप ने, ट्रंप कॉइन को बाजार में लॉन्च किया है। इसके माध्यम से उन्होंने काफी पैसा जमा कर लिया है। अभी तक वैश्विक मुद्रा के रूप में डॉलर की मान्यता थी। डोनाल्ड ट्रंप अब डिजिटल करेंसी को बढ़ावा दे रहे हैं। इस व्यवस्था को अभी दुनिया के देशों ने स्वीकार नहीं किया है। डॉलर और अन्य देशों की जो मुद्रा है, वह उन देशों के सोने के भंडार विदेशी मुद्रा और अन्य अंतरराष्ट्रीय मानदंड से तय होती है। क्रिप्टो करेंसी डिजिटल मुद्रा है, जिसका भगवान ही मालिक है। क्रिप्टो करेंसी का मूल्य शेयर बाजार की तरह खरीद और बिक्री के आधार पर तय होता है। शेयर का वास्तविक मूल्य 10 रूपये होता है। कंपनी अपने प्रीमियम को जोड़कर कई गुना महंगे दामों पर निवेशकों को शेयर बेचती है। वहीं शेयर दुनिया भर के शेयर बाजारों में वास्तविक मूल्य और प्रीमियम मूल्य से कई गुना ज्यादा मूल्य पर मांग और आपूर्ति के आधार पर कारोबार करता है। शेयर बाजार में जिस तरह से धारणा के आधार पर सट्टेबाजी होती है, वही स्थिति क्रिप्टो करेंसी की है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से स्वर्ण युग की कल्पना को साकार करना चाहते हैं। दुनिया भर में इसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक इवेंट माना जा रहा है। क्रिप्टो करेंसी को बढ़ावा देने पर नैतिकता तथा वास्तविक स्वरूप और भ्रष्टाचार बड़े पैमाने पर बढ़ना तय माना जा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीधे हित क्रिप्टो करेंसी से जुडे रहने के कारण क्रिप्टो करेंसी विवादों में है। वर्तमान में इसका असर शेयर बाजारों में पड़ना तय है। वैश्विक कारोबार में अभी तक डॉलर का दबदबा है। क्रिप्टो करेंसी को वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता मिलती है, ऐसी स्थिति में सबसे ज्यादा खतरा डॉलर मुद्रा पर पड़ना तय माना जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों का विरोध अमेरिक़ी राज्यों एवं यूरोप के देशों में बड़े पैमाने पर होना शुरू हो गया है। ट्रंप जिस तरह से रूस और चीन के साथ अपने संबंधों को बढ़ा रहे हैं। उसके पीछे क्रिप्टो करेंसी को चीन और रूस की मान्यता दिलाना है। ऐसी स्थिति में दुनिया के सारे आर्थिक समीकरणों को बदलते देर नहीं लगेगी। डिजिटल मुद्रा को आर्थिक मंदी से बाहर निकलने का उपाय भी बताया जा रहा है। जो पूरी तरह से कल्पना पर आधारित है। इस स्थिति में सारी दुनिया के देश एक बड़े आर्थिक संकट में फंस सकते हैं। इस तरह की आशंका आर्थिक विशेषज्ञ व्यक्त कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले का असर दुनिया भर के शेयर बाजारों में पड़ना तय माना जा रहा है। सारी दुनिया में जिस तरह से आर्थिक, राजनीतिक एवं सामरिक चुनौतियां देखने को मिल रही हैं, उसके कारण तरह-तरह की आशंका व्यक्त की जा रही है। उस आशंका में तृतीय विश्व युद्ध भी है।