नई दिल्ली: एक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि कश्मीर में करीब 84.2 फीसदी वयस्क शारीरिक रूप से निष्क्रिय जीवन जी रहे हैं, जिसमें किसी प्रकार का व्यायाम करना अथवा चलना शामिल नहीं है। इस गतिहीन जीवनशैली से हर दो में से एक व्यक्ति मोटापे की श्रेणी में आ गया है, जिससे वह मधुमेह और शरीर में अतिरिक्त वसा से संबंधित बीमारियों में की चपेट में आ रहा है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के तहत शेर-ए-कश्मीर आयुर्विज्ञान चिकित्सा संस्थान (स्किम्स) सौरा की एक विशेषज्ञ टीम ने कश्मीर और लद्दाख में मधुमेह, प्री-डायबिटीज, हाई ब्लडप्रेशर और मोटापे की जांच की। इस अध्ययन को लेकर 2024 के आखिर में जारी आंकड़ों से पता चलता है कि कश्मीर में करीब 55.3 फीसदी लोग मोटापे से पीड़ित हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा ज्यादा वजन और मोटापे को असामान्य या अत्यधिक वसा संचय के रूप में परिभाषित किया है जो स्वास्थ्य के लिए खतरा है। मोटापे के कई कारण होते हैं, जिनमें मनुष्य द्वारा ली गई कैलोरीज और उसके शरीर के अंदर कैलोरीज की खपत के बीच के असंतुलन को इसका मुख्य कारक माना गया है। अतिरिक्त उपभोग की गई कैलोरी शरीर में वसा के रूप में जमा हो जाती है। अध्ययन के मुताबिक कुल 2510 प्रतिभागियों का अध्ययन किया, जिनमें 70 फीसदी ग्रामीण पृष्ठभूमि से संबंधित थे। इस अध्ययन में पाया गया कि प्रतिभागियों में से केवल 15.8 फीसदी की जीवनशैली सक्रिय थी तथा शेष 84.2 फीसदी को ‘निष्क्रिय’ के रूप में वर्गीकृत किया गया था। वहीं 2010 में स्किम्स सौरा के एक अध्ययन में पाया गया कि 20 से 40 साल की आयु के 16 फीसदी लोग मोटापे का शिकार थे, जबकि इस आयु वर्ग में मधुमेह की बीमारी से ग्रस्त आबादी का 5 फीसदी से अधिक था। अध्ययन से यह बात भी सामने आई कि पिछले 14 सालों में मोटापे से ग्रस्त जनसंख्या का प्रतिशत करीब 55 फीसदी को पार कर गया। कश्मीर घाटी में मधुमेह से प्रभावित आबादी 7.8 फीसदी पाई गई, जहां ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में मधुमेह के मरीजों में एक बड़ा अंतर पाया गया, ग्रामीण क्षेत्रों के 5.6 फीसदी की तुलना में शहरी क्षेत्रों में 13.1 फीसदी से ज्यादा आबादी मधुमेह से प्रभावित पाई गई। मोटापे को हृदय रोग, स्ट्रोक, टाइप-2 मधुमेह और यहां तक कि कुछ कैंसर से निकटता से जुड़ा हुआ पाया गया। इसके अलावा इसे मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों से भी जोड़ा गया है। शहरी कश्मीर के अध्ययन में पाया गया कि 32.4 फीसदी आबादी हाई ब्लडप्रेशर से प्रभावित थी। अध्ययन में मोटापे, मधुमेह और जीवन पर उनके प्रभाव के बारे में जागरूकता की कमी भी पाई गई। केवल 55 फीसदी आबादी को ही इस बात की जानकारी थी कि मधुमेह रोकथाम योग्य है। जबकि 51 फीसदी को इस बात का पता था कि मधुमेह शरीर के अन्य अंगों को प्रभावित करता है। शायद इस कारण डॉक्टरों और चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा मोटापे के प्रभावों के बारे में गहन जागरूकता की जरुरत व्यक्त की जा रही है।