नई दिल्ली: राफेल फाइटर जेट की एक अलग पहचान है। ये एक मल्टीरोल लड़ाकू विमान है जो एडवांस टेक्नोलॉजी और युद्ध में अपनी क्षमता साबित कर चुका है, लेकिन फ्रांस का लालच जल्द ही इस फाइटर जेट के मार्केट को बर्बाद कर सकता है। फ्रांसीसी राफेल को अमेरिकी स्टील्थ फाइटर जेट एफ-35 या रूसी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान एसयू-57 से खतरा नहीं है, बल्कि दो ऐसे फाइटर जेट्स बाजार में आने वाले हैं, जो राफेल को चुनौती पेश कर सकते हैं। ये फाइटर जेट हैं दक्षिण कोरिया का केएफ-21 बोरामे और भारत का तेजस एमकेएल इन दोनों फाइटर जेट्स को लेकर दावा किया जा रहा है कि ये राफेल के बराबर शक्तिशाली हैं। इनमें एडवांस एवियोनिक्स और हथियार रखने की जगह है। इसके अलावा इन दोनों की कीमत भी राफेल की तुलना में काफी कम बताई जा रही है। डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये क्षमताएं फ्रांसीसी राफेल के बाजार को खराब कर सकती हैं। फ्रांस के लिए राफेल फाइटर जेट लंबे वक्त से एक प्रीमियम प्रोडक्ट रहा है। इसमें एडवांस रडार सिस्टम, एडवांस इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और मल्टीरोल क्षमताएं हैं। इस वजह से भारत, कतर और मिस्र के देशों ने राफेल फाइटर जेट खरीदा है, लेकिन राफेल फाइटर जेट की कीमत बहुत ज्यादा है। राफेल के रखरखाव, अपग्रेडेशन और हथियारों के एकीकरण में बहुत ज्यादा खर्च होता है, जिसकी वजह से देशों के लिए राफेल फाइटर जेट का मेंटिनेंस करना मुश्किल है। इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग की रिपोर्ट के मुताबिक 2016 में भारत ने 36 राफेल जेट के लिए 8.7 अरब डॉलर का सौदा किया था। इसमें कोई शक नहीं की राफेल को खरीदकर भारतीय वायुसेना की ताकत में जबरदस्त इजाफा हुआ है। डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर भागीदारी के तहत राफेल को बनाया जाता तो इस लागत को कम किया जा सकता था। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दक्षिण कोरिया में बना केएफ-21 बोरामे लड़ाकू विमान और भारतीय तेजस फाइटर जेट डिफेंस बाजार में तहलका मचा सकते हैं। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह ये है कि राफेल के मुकाबले इसके मेटिनेंस में काफी कम है। केएफ-21 एक 4.5-पीढ़ी का लड़ाकू विमान है, जिसका डिजाइन और डेवलपमेंट कोरिया एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने किया है। इस फाइटर जेट को खास तौर पर राफेल और टाइफून जैसे विमानों को टक्कर देने के लिए डिजाइन किया गया है। वहीं केएफ-21 लड़ाकू विमान के एक यूनिट की कीमत करीब 65 मिलियन डॉलर होने की संभावना है। लिहाजा देशों के लिए ये एक आकर्षक पैकेज हो सकता है। जबकि राफेल फाइटर जेट के एक यूनिट की कीमत 120 मिलियन डॉलर है। वहीं भारत का तेजस एमकेएल, जो स्वदेशी तेजास एमकेएल का एक विकसित वैरिएंट है, अगले कुछ सालों में ये बनकर तैयार हो जाएगा। इसमें एडवांस जीई एफ414 इंजन, एडवांस एवियोनिक्स और भारत के स्वदेशी हथियारों जैसे अस्त्र और ब्रह्मोस के साथ आसानी से एकीकरण की क्षमता है। लिहाजा तेजस एक बेहतरीन लड़ाकू विमान बन गया है। इसके अलावा इसका मेंटिनेंस और भी कम होने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक तेजस के एक यूनिट की कीमत सिर्फ 50 से 60 मिलियन डॉलर प्रति यूनिट हो सकती है। इसके अलावा क्षमताओं के लिहाज से ये राफेल फाइटर जेट से ज्यादा एडवांस होगा।



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