नई दिल्ली: केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि जहां तक आंतरिक सुरक्षा का प्रश्न है, उसके समक्ष हमें आतंकवाद, अलगाववाद, वामपंथी, सांप्रदायिक तनाव, घुसपैठ और संगठित अपराध जैसे खतरे देखने को मिल रहे हैं। वहीं बाहरी सुरक्षा में हमारी अपनी अलग चुनौतियां हैं। वर्तमान में साइबर और स्पेस आधारित चुनौतियां हमारे सामने आ रही हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि आंतरिक और बाहरी सुरक्षा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। रक्षा मंत्री सिंह के मुताबिक, डीआरडीओ मूलतः दो प्रकार की तकनीकी प्रणालियों पर कार्य करता है। एक ओर यह हमारी सेनाओं यानी आर्मी, नेवी और एयर फोर्स द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले बड़े प्लेटफार्म की तकनीक तैयार करता है। वहीं दूसरी ओर डीआरडीओ ऐसी प्रणालियां भी विकसित कर रहा है जिनका इस्तेमाल दूसरी सुरक्षा एजेंसियों द्वारा भी किया जा सकता है। इस श्रेणी में छोटे हथियार, बुलेट प्रूफ जैकेट, संचार के उपकरण, सर्विलांस उपकरण, ड्रोन और एंटी ड्रोन टेक्नोलॉजी शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री सिंह ने कहा, आजादी के बाद से भारत, चूंकि आर्थिक रूप से उतना समृद्ध नहीं था, इसकारण हमारा अधिकांश ध्यान अपनी मूलभूत जरूरतों पर टिका रहता था। अब इस नजरिये को दुर्भाग्यपूर्ण ही कह सकते हैं कि हम आपदाओं पर और उसके प्रभाव पर उतना ध्यान नहीं देते थे। हम आपदाओं और उनसे होने वाले जान-माल के नुकसान को अपनी नियति मान लेते थे। लेकिन अब स्थिति ऐसी नहीं है। उन्होंने कहा, आज भारत समृद्ध हो रहा है। आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में भी तकनीक की भूमिका बढ़ रही है। आप लोगों को याद होगा कि मौसम की भविष्यवाणी करने वाले अच्छे मैकेनिज्म के आने से पहले, साइक्लोन से जान-माल की बड़ी क्षति होती थी। लेकिन टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से यह स्थिति आज काफी हद तक बदली जा चुकी है। इसी प्रकार के अच्छे कार्य डिजास्टर मैनेजमेंट के दूसरे क्षेत्रों में भी किए जा रहे हैं। आज समूचे विश्व में प्राकृतिक आपदाओं का प्रकोप देखा जा रहा है। भारत भी इस प्राकृतिक आपदाओं से अछूता नहीं है। साइक्लोन, भूकंप, हिमस्खलन, बाढ़ और बादल फटने जैसी आपदाएं हमारे देश में भी देखी जा रही हैं। अभी हाल ही में उत्तराखंड के माणा में हिमस्खलन की घटना हुई है। अनेक निर्माण श्रमिक इससे प्रभावित हुए हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि हिमस्खलन की आपदा में थर्मल इमेजिंग, विक्टिम लोकेशन कैमरा और ड्रोन आधारित इंटेलिजेंट डिटेक्शन सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीक का प्रयोग हुआ। इससे होने वाले नुकसान को काफी कम करने का प्रयास हुआ। इन तकनीकों के चलते अनेक बहुमूल्य जानें बचाई जा सकीं। रक्षा मंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया में सुरक्षा व्यवस्था काफी जटिल नजर आ रही है। इस जटिल स्थिति का प्रमुख पहलू आंतरिक और बाहरी सुरक्षा के बीच बढ़ता ओवरलैप है।



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