शहीद भवानी दत्त जोशी राजकीय शौर्य महोत्सव की तैयारियां तेज, 6 जून को करेंगे सीएम धामी उद्घाटन

अशोक चक्र विजेता शहीद भवानी दत्त जोशी की स्मृति में तीन दिवसीय आयोजन

 उत्तराखंड के प्रथम अशोक चक्र विजेता शहीद भवानी दत्त जोशी की स्मृति में 6 से 8 जून तक चेपड़ो में आयोजित होने वाले राजकीय शौर्य महोत्सव की तैयारी जोरों पर चल रही है। मेला अध्यक्ष बीरू जोशी, सचिव देवेंद्र सिंह रावत, संयोजक प्रधानाचार्य दिगपाल सिंह गडिया ने बताया 6 से 8 जून तक चलने वाले राजकीय शौर्य महोत्सव की सफलता के लिए लिए 5 जून को महिला मंगल दल स्थानीय लोगों द्वारा भूमि पूजन कर हवन यज्ञ किया जाएगा 6 जून को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मेले का उद्घाटन करेंगे जिसमें उत्तराखंड सरकार के कई मंत्रियों को भी आमंत्रित किया गया है।कार्यक्रम के अनुसार 6 जून को मेला उद्घाटन के साथ स्कूली छात्र-छात्राओं के द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे रात्रि को लोक गायक दर्शन फरस्वाण,हेमा नेगी करासी तथा उत्तराखंड के बड़े कलाकारों द्वारा रंगारंग प्रस्तुतियां दी जाएगी, मेले में सेना द्वारा मेडिकल कैंप तथा पूर्व सैनिकों के लिए कैंटीन की भी व्यवस्था की गई की जाएगी मेला अध्यक्ष बीरु जोशी ने बताया मेले को भब्य बनाने के लिए सभी को जिम्मेदारियां सौंपी गई है। उन्होंने बताया शहीद जोशी को यूं ही शांतिकालीन अशोक चक्र से नही नवाजा गया हैं।

जिस तरह से उन्होंने देश की अखंडता,अशुणता को बनाएं रखने के लिए हंसते हुए अपने प्राणों की बाजी लगाई वह अपने आप में जानकर देश के लिए मौत को गले लगाना जैसा था। बात  जब 1984 में पंजाब में आतंकवाद चरम पर था, आतंकवादियों ने अमृतशहर के एक महत्वपूर्ण भवन पर कब्जा जमा लिया था। उसे खाली कराने के लिए और पंजाब को आतंकवाद से मुक्त करवाने के लिए भारत सरकार ने ऑपरेशन ब्लू स्टार की घोषणा की थी। महत्वपूर्ण बिल्डिंग को आतंकवादियों से खाली कराने की जिम्मेदारी सेना के सोपी गई जिसमे नायक भवानी दत्त जोशी की सातवीं एवं नौवीं प्लाटून को भेजा गया ।

जब प्लाटून उस कांप्लेक्स के करीब पहुंची तो आतंकियों  ने अंदर से गोलियों की बरसात कर दी जिस पर कंपनी आगे नही बढ पाई ऐसे में कंपनी कमांडर ने अपने जवानों से इस समस्या से निपटने के लिए आगे आने की अपील की तो सबसे पहले थराली विकासखंड के चेपड़ो गांव निवासी शहीद जोशी आगे आएं और उन्होंने कांप्लेक्स के अंदर छिपे आतंकियों पर खिड़की नुमा रास्ते से घुसकर सबसे पहले धावा बोल कर गेट के पास मौजूद एक आतंकी को ढ़ेर कर दिया, इस दौरान वे भी गोलियों से घायल हो गए थे। बावजूद उनका देश की रक्षा का जज्बा कम नही हुआ था। और वे अपनी करबाइन से गोलियों की बौछार करते हुए आगे बढ़ते रहे जिससे उनकी प्लाटून के अन्य सैन्य कर्मी भी आगे बढ़े ।

एक तरह से वे अपनी प्लाटून का ढाल बने हुए थे।इसी दौरान वें वीर गति को भी प्राप्त हो गए किन्तु तब तक उसकी प्लाटुन को आगे बढ़ने का रास्ता मिल गया। बाद में सेना ने इस इमारत पर अपना कब्जा कर लिया। इस आपरेशन में देश के जोशी सहित 7 जवान शहीद हुए थे। जबकि 10 से अधिक सैन्य अधिकारी व जवान घायल हुए। इस आपरेशन को 5 व 6 जून  1984 की मध्य रात्रि को अंजाम दिया गया। अपने प्राणों की परवाह किए बगैर जिस तरह से शहीद जोशी ने शहादत दी उसे देखते हुए सरकार ने उन्हें मरणोपरांत शांतिकालीन अशोक चक्र से नवाजा गया । प्रत्येक वर्ष 6 से 8 जून तक उनकी याद में शहिद स्मारक पर रीत चढ़ा कर तीन दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है।

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