देहरादून: मूल निवास भू कानून संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी ने कहा है कि राज्य के विभिन्न विभागों में घोटाले एवं भ्रष्टाचार चल रहे लेकिन केन्द्र सरकार की जल जीवन मिशन के अंदर कई खामियां है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि अभियंताओं, अधिकारियों एवं ठेकेदारों के गठजोड़ से लगभग 450-500 करोड का भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने कहा कि वहीं मैसर्स यूनिप्रो टेक्नो, इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड हरियाणा की कंपनी को ब्लैक लिस्टेड करने के लिए उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम के मुख्य अभियंता गढ़वाल ने प्रबंध निदेशक को अपनी अनुशंसा दी है लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है क्योंकि इस कंपनी के साथ जल निगम मुख्यालय के मुख्य अभियंता ने इस कंपनी में अप्रत्यक्ष रूप से निवेश किया है। यहां परेड ग्राउंड स्थित उत्तरांचल प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि आरटीआई से खुलासे यह सारा भ्रष्टाचार का प्रकरण सामने आया है और अभियंताओं, अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से जल जीवन मिशन में यह भ्रष्टाचार किया गया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में भ्रष्टाचार, निर्माण कार्यों में आम बात हो गई है और जीरो टाॅलरेंस धरातल पर नहीं दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में भ्रष्टाचार की जड़े पूरी तरह से पैर पसार चुकी है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारी अप्रत्यक्ष रूप से ठेकेदार बन गये है। कंपनी को मुख्य अभियंता गढ़वाल के आदेश के बाद ब्लैक लिस्टेड नहीं किया जा रहा है और उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन अब नल कमीशन मिशन बनकर रह गया है। उन्होंने कहा कि गढ़वाल मंडल में जल जीवन मिशन के तहत करीब 800 करोड़ की लागत के 44 पेयजल योजनाओं का निर्माण चल रहा है। उन्होंने कहा कि अधिकारी स्लीपिंग पार्टनर के रूप में काम कर रहे हैं। अधिकतर पेयजल योजनाओं को बाहर की कंपनियों को दिया गया है और जिन्हें ब्लैकलिस्ट किया गया है, उन कंपनियों को संरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में मानकों की अनदेखी की जा रही है और जल जीवन मिशन में स्थानीय ठेकेदारों को कार्य नहीं दिया जा रहा है और बाहरी ठेकेदारों को कार्यों के ठेके दिए जा रहे और एक ही हरियाणा की कंपनी जिसे ब्लैक लिस्टेड करने के लिए अनुशंसा की गई है को 372 करोड़ रूपये के 17 प्रोजेक्ट दिये गये है और वहीं दूसरी ओर हल्द्वानी में इसी कंपनी को हल्द्वानी में सौ करोड़ के प्रोजेक्ट देने के कार्य देने की तैयारी चल रही है और यह कंपनी मानकों के विपरित कार्य कर रही है और पेयजल निगम के मुख्य अभियंता मुख्यालय संजय सिंह की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।






