कराची: तुर्की का युद्धपोत टीसीजी बुयुकाडा (एफ-512) रविवार को पाकिस्तान के कराची बंदरगाह पर पहुंचा, जिसे पाकिस्तानी नौसेना ने ‘सद्भावना यात्रा’ बताया है। यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच पहलगाम हिंदू नरसंहार के बाद तनाव चरम पर है। तुर्की के इस कदम ने क्षेत्रीय समीकरणों पर सवाल खड़े किए हैं, लेकिन सैन्य ताकत की बात करें तो भारत की नौसेना का जवाब नहीं। आइए, पहले तुर्की के इस जहाज की ताकत को समझें और फिर देखें कि भारत का दमखम कैसे इसे पीछे छोड़ता है।
इस जहाज की अधिकतम स्पीड 29 नॉट (54 किमी/घंटा) है। इसकी रेंज 15 नॉट पर 3,500 नॉटिकल मील (6,500 किमी) की दूरी तक जा सकता है। इसमें क्रू की संख्या 93 और अधिकतम 106 तक हो सकती है। तुर्की का दावा है कि यह जहाज स्टील्थ तकनीक से लैस है, जिससे रडार पर पकड़ में आना मुश्किल होता है। यह क्षेत्रीय मिशनों के लिए ठीक है, लेकिन भारत की नौसेना की ताकत के सामने यह इतना खास नहीं है। आईएनएस कुठार और आईएनएस खंजर जैसे कामोर्ता-क्लास कोरवेट्स टीसीजी बुयुकाडा से कहीं ज्यादा ताकतवर हैं। इनकी रेंज और हथियारों की मारक क्षमता तुर्की के जहाज को पीछे छोड़ती है। भारत के जहाजों पर ब्रह्मोस मिसाइल लगी हैं जो 400 किमी तक निशाना साध सकती है। ये हार्पून मिसाइल से कहीं आगे है। इसकी स्पीड और सटीकता दुश्मन जहाजों के लिए घातक है। इसके अलावा भारत के पास विक्रांत जैसे स्वदेशी विमानवाहक पोत, विशाखापट्टनम-क्लास डिस्ट्रॉयर, और शिवालिक-क्लास फ्रिगेट्स हैं, जो लंबी दूरी के युद्ध और क्षेत्रीय प्रभुत्व में तुर्की-पाक गठजोड़ से कहीं आगे हैं।






