वॉशिंगटन: भारत और इजरायल की साझेदारी मुख्य रूप से आतंकवाद से निपटने, लोगों की जान बचाने और आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने पर केंद्रित एक व्यावहारिक सहयोग है।
एक रिपोर्ट में कहा गया है कि आज दोनों देश समान सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जहां दुश्मन नागरिकों का इस्तेमाल ढाल के रूप में करते हैं, सीमा पार से हमले करते हैं और आतंक फैलाने की रणनीति अपनाते हैं। इसके जवाब में दोनों देशों ने सर्जिकल स्ट्राइक, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और नागरिक नुकसान को न्यूनतम रखने जैसी नीतियां अपनाई हैं।
अमेरिका स्थित जर्नल द एल्गेमाइनर में लिखते हुए भारतीय-जर्मन अंतरसांस्कृतिक और भू-राजनीतिक सलाहकार पौशाली लास ने कहा कि इज़राइल में हाल ही में मनाए गए मेमोरियल डे और स्वतंत्रता दिवस इस बात की याद दिलाते हैं कि राष्ट्र निर्माण की कीमत युद्धभूमि और आम जिंदगी दोनों में चुकानी पड़ती है।
उन्होंने कहा कि एक साल पहले पहलगाम में भारत ने भी यही सच्चाई देखी, जब पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी भारतीय सीमा में घुस आए और महिलाओं व बच्चों के सामने 26 पुरुषों की निर्मम हत्या कर दी।
लास ने कहा, “यह कोई अलग-थलग हिंसक घटना नहीं थी, बल्कि नागरिकों को निशाना बनाकर विश्वास तोड़ने और भय फैलाने की सोची-समझी साजिश थी।”
उन्होंने कहा कि भारत की ओर से शुरू किया गया ऑपरेशन सिंदूर एक बड़ा रणनीतिक बदलाव था। इसके तहत पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि के कई अहम प्रावधानों को निलंबित कर दिया।
भारत पहले पाकिस्तान को नदी प्रवाह और जल स्तर से जुड़ा हाइड्रोलॉजिकल डेटा उपलब्ध कराता था, जो उसकी कृषि व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण था। लेकिन हमले के बाद यह सहयोग रोक दिया गया।
लास ने कहा कि यह कदम वियना संधि कानून सम्मेलन के अनुच्छेद 62 के अनुरूप भी है, जो परिस्थितियों में बुनियादी बदलाव और विश्वास खत्म होने की स्थिति में संधि निलंबन की अनुमति देता है।
उन्होंने कहा कि भारत और इजरायल दोनों समान खतरों का सामना कर रहे हैं और समान तरीके से जवाब दे रहे हैं, लेकिन वैश्विक प्रतिक्रिया अलग-अलग रही है। इजरायल को फिलिस्तीन मुद्दे पर लगातार आलोचना झेलनी पड़ती है, जबकि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई पर अपेक्षाकृत कम अंतरराष्ट्रीय आक्रोश देखने को मिला।
लास ने यह भी कहा कि भारत ने सूचना युद्ध के मोर्चे पर प्रभावी रणनीति अपनाई है। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को सनसनीखेज प्रचार के बजाय रणनीतिक उपलब्धियों के रूप में पेश किया, पाकिस्तान आधारित दुष्प्रचार नेटवर्क को उजागर किया और फेक न्यूज से निपटने के लिए मीडिया साक्षरता बढ़ाई।
उन्होंने कहा, “यही वह क्षेत्र है, जहां इजरायल को अगला कदम उठाने की जरूरत है। केवल खुफिया तंत्र और रक्षा तकनीक काफी नहीं है, यदि उसके साथ स्पष्ट और प्रभावी संवाद न हो।”
लास ने जोर देकर कहा कि भारत और इजरायल दोनों समझते हैं कि आतंकवाद से अकेले नहीं लड़ा जा सकता। यूरोप और अमेरिका के सहयोगियों के साथ बेहतर खुफिया साझेदारी तथा जमीनी और सूचना दोनों मोर्चों पर आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति जरूरी होगी।
--आईएएनएस
