बीजिंग: अमेरिकी चुनौती की निपटने के लिए चीन ने हाइपरसोनिक मिसाइलें तैयार करने वाले प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी। ड्रोन वॉर में चीन अमेरिका से आगे निकलने की फिराक में है। ड्रोन पर नए शोध करते-करते ऐसे हथियारों की खोज शुरू हो गई है कि एक नेटवर्क में कई सारे अनमैंड कॉम्बेट एयर वेहिकल यानी ड्रोन को कनेक्ट करके एक साथ हमला बोला जा सके। इस तकनीक को स्वार्म कहा जाता है। बीजिंग इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की एक स्टडी में इस स्मार्ट स्वार्म का जिक्र है। चीनी वैज्ञानिक इसी तरह के स्मार्ट स्वार्म पर काम करना शुरू कर चुके हैं। चीन तो एटमॉस्फेयर के भीतर आवाज की गति से 5 गुना तेज चलने वाले हाइपरसोनिक को नेटवर्क में जोड़कर एक स्मार्ट स्वार्म बनाने में जुटा है। यह स्मार्ट स्वार्म अकेले मिसाइल से ज्यादा खतरनाक है। हालांकि ये हाइपरसोनिक वेपन बैलेस्टिक मिसाइल से रफ्तार में धीमी होगी, लेकिन कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता के चलते इन्हें रडार या किसी और माध्यम से पकड़ पाना मुश्किल होगा। यही नहीं, इन स्मार्ट स्वार्म के जरिए परमाणु हथियारों को भी दागा जा सकता है।
अमेरिका ने भी इसी तरह का एक प्रोग्राम साल 2017 में शुरू किया था जिसका नाम था एमएसईटी यानी मिसाइल मल्टीपल सिमुलटेनियस एंगेजमेंट टेक्नोलॉजी। इसमें कई मिसाइल को एक साथ मिलकर अलग-अलग टार्गेट को निशाना बनाया जा सकता है। जानकारों के मुताबिक, एमएसईटी कोई हाइपरसोनिक मिसाइल वाला स्ट्रैटेजिक सिस्टम नहीं है, बल्कि यह एक छोटे स्तर का टैक्टिकल सिस्टम है। चीनी वैज्ञानिक इसी तरह का स्वार्म बनाने की तैयारी में हैं, लेकिन हाइपरसोनिक मिसाइलों के साथ।






