नई दिल्ली: पंजाब के अमृतसर और जालंधर में हुए बम ब्लास्ट पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सीएम भगवंत मान और डीजीपी के बयानों का जिक्र करते हुए सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब के सीएम भगवंत मान इसे छोटी घटना बता रहे हैं, वहीं डीजीपी का कहना है कि यह आईएसआई का ऑपरेशन था।
मंगलवार को पंजाब में दो धमाकों से हड़कंप मच गया था। रात करीब 10:50 बजे अमृतसर में खालसा आर्मी कैंप की दीवार के पास धमाका हुआ। इससे करीब दो घंटे पहले जालंधर में बीएसएफ मुख्यालय के पास भी विस्फोट हुआ था। मुख्यमंत्री मान ने बुधवार को इन धमाकों को छोटा बताया और इसे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा द्वारा हिंसा भड़काने की कोशिश से जोड़ दिया। इस पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पलटवार किया है।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इसकी निंदा करते हुए मुख्यमंत्री को अपना बयान वापस लेने की सलाह दी और कहा कि पंजाब एक संवेदनशील सीमावर्ती राज्य है और इसका इतिहास सीमा पार से होने वाली हिंसा से जुड़ा रहा है। हमारा पड़ोसी देश आतंकवाद को नीति के रूप में इस्तेमाल करता है और उसे बढ़ावा देता है। सोशल मीडिया पर भी हमले से पहले कई पोस्ट सामने आए थे और जालंधर हमले की जिम्मेदारी खालिस्तान लिबरेशन आर्मी ने ली है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि पंजाब के मुख्यमंत्री इस घटना की अलग व्याख्या कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के पास गृह विभाग भी है और उनके डीजीपी ने स्पष्ट रूप से इसे आईएसआई समर्थित ऑपरेशन बताया है। आतंकवाद के मुद्दे को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। यह देश की सुरक्षा का मामला है, खासकर पंजाब जैसे सीमावर्ती राज्य में। मुख्यमंत्री अपने ही पुलिस प्रमुख के बयान से सहमत नहीं दिखते और उन्हें जनता को इसका जवाब देना होगा। यह स्थिति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा, ''मुख्यमंत्री राज्य के गृह मंत्री भी हैं, लेकिन उनके अपने डीजीपी स्पष्ट रूप से कह रहे हैं कि यह सीमा पार से की गई, आईएसआई समर्थित कार्रवाई है। दूसरी बात, जब यह घटना रात 8 बजे हुई, तो शुरुआत में किसी ने इसे वाहन में आग लगने की घटना बताया। यह वाहन में आग नहीं थी, बल्कि एक आईईडी विस्फोट था। दूसरी घटना, जो रात 10:50 बजे हुई, वह भी पूरी तरह से आईईडी विस्फोट थी।''
उन्होंने कहा, ''उन्हें जनता को इसका जवाब देना होगा। वे अपनी ही नाकामी को राजनीतिक रंग दे रहे हैं। आखिरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य की जिम्मेदारी है, खासकर सीमावर्ती राज्य में, जहां सीमा पार आतंकवाद का इतिहास रहा है। इसलिए मैं मानता हूं कि मुख्यमंत्री का यह बयान बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और खेदजनक है।''
--आईएएनएस
