नई दिल्ली: पहलगाम के हत्यारों की सघन तलाश की जा रही है। खुफिया एजेंसियों के पास जो सूचनाएं आ रहीं हैं उसके मुताबिक पहलगाम से 30 किमी के दायरे में उनके छिपे होने की संभावना है। सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट के अनुसार आतंकी क्षेत्र से बाहर निकलने का हर कोशिश कर रहे हैं। पाकिस्तान भी इन्हें यहां से निकालने की फिराक में है। यह भी संभावना है कि गुफाओं में छिपे इन आतंकियों के पास अब कुछ ही दिनों का खाना बचा हुआ है। इसके बाद ये भूख से तड़पेंगे और बाहर निकलेंगे।
संदेह है कि अनंतनाग जिले के घने जंगल और प्राकृतिक गुफाएं आतंकवादियों के लिए कवच का काम कर रही हैं। बहुत जल्द सटीक लोकेशन पर ऑपरेशन को अंजाम दिया जाएगा। आतंकियों ने कम से कम 15-20 दिन का राशन भी जमा किया होगा। पहलगाम और बैसरन में व इसके आस-पास के इलाकों में 20 अप्रैल से सक्रिय रहे सभी मोबाइल फोन के डेटा की जांच हो रही है। सुरक्षा एजेंसियों की कोशिश दहशतगर्दों को जिंदा पकड़ने की है, ताकि जिस तरह से मुंबई हमले में कसाब के पकड़े जाने पर पाकिस्तान बेनकाब हुआ था वैसे ही इस हमले का भी सच दुनिया के सामने आए। सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पहलगाम हमले की जांच के साथ राजौरी-पुंछ, बोटापथरी और गगनगीर में हुए सुरक्षाबलों व आम नागरिकों पर हुए हमलों के षड्यंत्र, उनमें शामिल सभी स्थानीय मददगारों के नेटवर्क का खुलासा करना है। साथ ही यह भी पता लगाया जाना है कि राजौरी-पुंछ से कश्मीर के भीतर तक इन आतंकियों का नेटवर्क का मूल स्रोत कहां है।






