नई दिल्ली, 4 जून (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा कंपाउडिंग ऑर्डर जारी करने के कारण मंत्रा डिजाइन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट, 1999 (फेमा) के उल्लंघन की जांच को समाप्त कर दिया गया है। यह बयान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से गुरुवार को दिया गया।
जांच एजेंसी द्वारा जारी बयान में कहा गया कि मंत्रा के मामले में ईडी की ओर से 'नो ऑब्जेक्शन'सर्टिफिकेट जारी करने के बाद फेमा, 1999 की धारा 15 के तहत आरबीआई ने यह कंपाउडिंग ऑर्डर 20 अप्रैल,2026 को जारी किया था।
ईडी ने विश्वनीय जानकारी मिलने के बाद फेमा के तहत मंत्रा के खिलाफ जांच शुरू की थी। यह दो मामलों को लेकर थी।
इसमें पहला, एफईएम (किसी भी विदेशी प्रतिभूति का हस्तांतरण या निर्गमन) विनियम, 2004 के विनियम 15(iii) के तहत एपीआर प्रस्तुत करने में देरी, जिसमें 42.85 करोड़ रुपए शामिल थे।
दूसरा, फेमा 120/आरबी-2004 के विनियमन 6(2)(iv) के तहत एपीआर प्रस्तुत करने तक ओडीआई के माध्यम से वित्तीय प्रतिबद्धता थी, जिसमें 3.03 करोड़ रुपए शामिल थे।
ईडी ने बताया कि जांच के दौरान कंपनी ने फेमा की घारा 15 के प्रावधानों के मुताबिक, आरबीआई के पास कपाउंडिंग ऑर्डर के लिए आवेदन कर दिया है।
नियमों के मुताबिक, कपाउंडिंग ऑर्डर के तहत कंपनी जुर्माने के रूप में एक निश्चित राशि देकर मामले को खत्म कर सकती है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, आरबीआई के संदर्भ पर, ईडी ने अधिनियम की वास्तविक भावना के अनुरूप इस प्रकार के समझौते पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
ईडी द्वारा जारी की गए 'नो ऑब्जेक्शन'सर्टिफिकेट के आधार पर, आरबीआई ने कपाउंडिंग ऑर्डर द्वारा उक्त उल्लंघनों को 2,88,000 रुपए के एकमुश्त भुगतान के साथ निपटा दिया है।
ईडी के बेंगलुरु जोनल ऑफिस द्वारा फेमा के उल्लंघन को लेकर मंत्रा के खिलाफ जांच जुलाई 2025 में शुरू की गई थी।