हरिद्वार विष्णु लोक कॉलोनी में करोड़ों रुपए मूल्य की सरकारी भूमि पर हुए अवैध कब्जे का मामला अब केवल भू माफियाओं तक सीमित नहीं रह गया बल्कि इस कब्जे के मामले में राजस्व विभाग के कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं वहीं शक की सुई भेल के अधिकारी की तरफ भी जाती है क्योंकि इस बड़े खेल में गलत रिपोर्ट बनाने में उक्त अधिकारी के भी हस्ताक्षर हैं ।
इस मामले मे हरिद्वार जिला प्रशासन भले ही कुंभ करनी नींद से जाग गया हो, जिसने आनन-फानन में कार्रवाई करते हुए कब्जा तो हटवा दिया लेकिन इस पूरे खेल के पीछे अहम भूमिका निभाने वाले हल्का लेखपाल एवं भेल के अधिकारी के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई । बताते चलें कि तीन बीघा जमीन जिसका खसरा नंबर 1291 अहमदपुर कड़छ जो की सरकारी रिकॉर्ड में भेल द्वारा अधिगृहृत गई भूमि है। जिसे अवैध अतिक्रमणकारियों के पुनर्वास मैं उपयोग किया गया जिसका डेवलपमेंट एच आर डी ए किया ।
अचानक एक व्यक्ति द्वारा खसरा संख्या 1291 पर मालिकाना हक दिखाते हुए तीन बीघा जमीन कब्जा ली गई। और राजस्व विभाग की मिली भगत से उसे भूमि को रिकॉर्ड में अपने नाम दर्ज करने का प्रयास किया गया । प्रशासनिक पारदर्शिता पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो रहा है। दरअसल मामला बेश कीमती सरकारी भूमिका से जुड़ा है, जिसे भू माफियाओं के द्वारा सुनियोजित तरीके से कब्जाने का प्रयास किया गया था सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि सरकारी अभिलेखों में दर्ज भूमि को आबादी की भूमि दर्शाने का प्रयास किया गया।
इतना बड़ा खेल बिना प्रशासनिक हस्त के संभव नहीं, जिस प्रकार वास्तविक अभिलेख और पुराने रिकॉर्ड की अनदेखी करते हुए रिपोर्ट तैयार की गई है, जिससे साफ लगता है कि हल्का लेखपाल ने अपने पद और अधिकार का दुरुपयोग किया है। यह कब्जा जिला अधिकारी के निर्देश पर उप जिला अधिकारी के नेतृत्व में टीम गठित कर भारी पुलिस की मौजूदगी में मौके से कब्जा तो हटा दिया गया है जिसकी हटाया गया। अब सवाल उठता है कि वह कौन लोग हैं जो उक्त माफिया को संरक्षण दे रहे थे । पर्दे के पीछे के लोगों का नाम उजागर होना चाहिए
