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राज्यों ने कोल इंडिया की 20 हजार करोड़ की राशि नहीं चुकाई, वसूली की तैयारी

 
prahlad joshi
नई दिल्‍ली: कोयले की कमी को लेकर मचे बवाल के बीच  देश में बिजली संकट बढ़ने की संभावना बरकरार है। देश के विभिन्न बिजली संयंत्र इस समय कोयले की कमी से जूझ रहे हैं। इससे इस बीच केंद्र सरकार ने जानकारी दी है कि राज्‍यों के पास कोल इंडिया का करीब 20 हजार करोड़ रुपए बकाया है। जानकारी के अनुसार इनमें कर्नाटक, मध्‍य प्रदेश, महाराष्‍ट्र, राजस्‍थान, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु बड़े डिफॉल्‍टर के रूप में हैं। इसके साथ ही कोयला मंत्रालय ने उत्‍तर प्रदेश, महाराष्‍ट्र, तमिलनाडु और राजस्‍थान को पत्र लिखकर उनसे बकाया चुकाने को कहा है। कोयला संकट के बीच यह भी बात सामने आई है कि कोयला मंत्रालय की ओर से राज्‍यों को फरवरी में ही पत्र लिखकर कोयले का भंडार रखने और आवंटन वाला कोयला सुचारू रूप से उठाने को कहा गया था। यह भी कहा गया है कि अधिक रकम बकाया होने के बावजूद राज्‍यों को कोयले की आपूर्ति जारी रखी गई।
कोयला मंत्रालय का कहना है कि झारखंड, राजस्‍थान और पश्चिम बंगाल जैसे राज्‍यों में कोयले की खदानें हैं। लेकिन इनमें या तो खनन बिलकुल नहीं किया गया और या तो कम किया गया। कोयला मंत्रालय के अनुसार महाराष्‍ट्र पर 3176 करोड़ रुपए बकाया हैं। उत्‍तर प्रदेश पर 2743 करोड़ रुपए की बकाया राशि है। पश्चिम बंगाल पर 1958 करोड़ रुपए बकाया हैं। वहीं तमिलनाडु और राजस्‍थान पर क्रमश: 1281.7 करोड़ रुपए और 774 करोड़ रुपए बकाया हैं। वहीं कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा है कि ताप बिजली संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति मंगलवार को सामूहिक रूप से 20 लाख टन को पार कर गई है। उन्होंने दावा किया कि बिजलीघरों को कोयले की आपूर्ति बढ़ाई गई है। कोयला मंत्रालय का कहना है कि राज्‍यों ने कोयले का खनन ठीक से नहीं किया। साथ ही कोल इंडिया से भी कोयला सुचारू रूप से नहीं लिया गया, ऐसे में संकट गहरा गया है। वहीं देश में छाए कोयला संकट का एक कारण आयाति‍त कोयला महंगा होना भी बताया जा रहा है। ए‍क रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च 2021 में आयातित कोयले की कीमत 4200 रुपए टन थी लेकिन सितंबर अक्‍टूबर में यह 11520 रुपए प्रति टन हो गई थी। इससे भी कोयला संकट बढ़ा और बिजली उत्‍पादन लड़खड़ा गया।