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महाराष्ट्र सरकार की मजबूती और शरद पवार की चाहत

राज्य की महाविकास आघाडी सरकार को अस्थिर करने का आरोप
 
sharad pawar

सुधीर जोशी
राज्य की शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस इन तीनों दलों के सहयोग से उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में  बनी सरकार को अस्थिर करने का आरोप लगाते हुए राकांपा सुप्रिमो तथा महाविकास आघाड़ी सरकार के महानायक शरद पवार ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि केंद्र सरकार राज्य सरकार को गिराने के लिए तरह-तरह के षडयंत्र रच रही है। ईडी, सीबीआई, नार्काेटिक्स, प्रवर्तन निदेशालय जैसी सरकारी जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करके केंद्र सरकार महाराष्ट्र की महाविकास आघाडी सरकार को अस्थिर करने का जो अभियान चला रखा है, उसे सफल नहीं होने दिया जाएगा। शरद पवार ने बड़ी बेबाकी से कहा है कि केंद्र चाहे कितने भी छापे डलवाए, कुछ भी कर ले, लेकिन राज्य की उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार अपना पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करेगी। इतना ही नहीं, शरद पवार ने यह भी विश्वास जताया है कि वर्तमान सरकार अपना कार्यकाल पूरा करने के साथ-साथ अगली बार फिर सत्ता में आएगी। शरद पवार के इस बयान से यह खुलासा हो गया है कि राज्य में शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस के बीच का महागठबंधन अगले विधानसभा चुनाव तक जारी रहेगा।
शरद पवार राज्य की महाविकास आघाडी सरकार के मंत्रियों के विरोध में सरकारी एजेसियों की ओर से मारे जा रहे छापों को केंद्र सरकार के इशारे पर की गई कार्रवाई करार देते दावा कर रहे हैं कि मोदी सरकार ऐसा करके अपनी ही छवि खराब कर रही है।
2019 के विधानसभा चुनाव के बाद शिवसेना ने मुख्यमंत्री पद की मांग करते हुए भाजपा के साथ मिलकर राज्य में सरकार बनाने से साफ इंकार कर दिया और अपने बिल्कुल विरोधी विचारधारा वाली राकांपा तथा कांग्रेस के साथ मिलकर महाविकास आघाडी के बैनर तले सरकार बना ली। इस बेमेल सरकार के गठन के बाद से ही नितीन गडकरी समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने कहा था कि यह सरकार  कुछ ही दिनों की मेहमान है, लेकिन भाजपा के केंद्रीय तथा महाराष्ट्र राज्य के नेताओं की ओर से बार-बार सरकार को कटघरे में खड़ा करने के बावजूद राज्य की महाविकास आघाडी सरकार अपना काम करती रही और अगले माह वह अपना दो साल का कार्यकाल पूरा कर लेगी।
जिन राज्यों में भाजपा की सरकार नहीं है, वहां पर केंद्र सरकार हस्तक्षेप करके उस सरकार को गिराने की हरसंभव कोशिश कर रही है, कुछ इसी तरह की कोशिश महाराष्ट्र में भी भाजपा के स्थानीय तथा भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं की ओर से लगातार की जा रही है। उल्लेखनीय है कि जब राज्य में महाविकास आघाडी सरकार का गठन किया जा रहा था तो सवाल यह उठाया जा रहा था कि तीनों दलों को मिलाकर बनने वाली सरकार का नेतृत्व कौन करेगा। जिस वक्त यह सवाल उठाया जा रहा था, उस वक्त दबी जुबान से यह भी सुनने को मिल रहा था कि राज्य की कमान शिवसेना के युवा नेता तथा शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के सुपुत्र आदित्य ठाकरे करेंगे, लेकिन बाद में शरद पवार के कहने पर सरकार की कमान उद्धव ठाकरे ने संभाली। हालांकि जिस वक्त राकांपा सुप्रिमो शरद पवार ने शिवसेना प्रमुख के समक्ष मुख्यमंत्री पद स्वीकारने का प्रस्ताव रखा था, उस वक्त उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद स्वीकारने से साफ इंकार कर दिया था और कहा था कि आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव शरद पवार के समक्ष रखा था, लेकिन राजनीतिक चाणक्य की उपाधि प्राप्त शरद पवार ने सरकार के गठन के बाद आने वाली परेशानियों को ध्यान में रखते हुए उद्धव ठाकरे से मुख्यमंत्री पद स्वीकारने का आग्रह किया था, जिसे काल, परिस्थिति का भान रखते हुए उद्धव ठाकरे ने स्वीकार कर लिया।
उद्धव ठाकरे का भी राजनीतिक अनुभव बहुत कम है, क्योंकि पहले वे कभी राज्य की राजनीति में शामिल नहीं हुए। भले ही भाजपा तथा अन्य विरोधियों को उद्धव ठाकरे समय-समय पर आड़े हाथ लेते रहे हो, लेकिन जहां तक राजनीतिक दांवपेंच का सवाल है, वे राकांपा-कांग्रेस के नेताओं की तुलना में बिल्कुल  शून्य हैं। शरद पवार ने कहा कि राज्य के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख पर आरोप लगाने वाले पुलिस आयुक्त का कहीं अता-पता नहीं है। अनिल देशमुख पर आरोप लगने के बाद उन्होंने गृहमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। आरोप करने वाले पुलिस आयुक्त पर अपराध दर्ज किए जा रहे हैं, वे कहां हैं, यह किसी को पता नहीं है। राकांपा सांसद सुप्रिया सुले ने भी ईडी समेत अन्य जांच एजेंसियों की ओर से की गई कार्रवाई को केंद्र के इशारे पर की गई कार्रवाई करार देते हुए कहा है कि ईडी या अन्य सभी जांच एजेंसियों की ओर से की गई कार्रवाई केंद्र सरकार की तानाशाही के अलावा कुछ और नहीं है।
राज्य में पिछले कुछ दिनों से बहुत से नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई, कुछ लोगों के यहां छापे मारे गए। इन छापेमारी में राकांपा सुप्रिमो शरद पवार ते परिजनों को भी बनाया गया है। राज्य के नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने भी राज्य की महाविकास आघाडी सरकार गिराने वालों को आगाह करते हुए कहा कि वे ऐसा करने से बाझ आएं। राकापां नेता नबाव मलिक, मनी लांड्रिग मामले में अभिनेत्री नीरा फतेही को भी फंसाया गया है, ऐसा भी कहा जा रहा है। सच पूछा जाए तो शरद पवार राज्य की महाविकास आघाडी सरकार का कार्यकाल पूरा होता देखना चाहती है, चूंकि अभी राज्य की महाविकास आघाडी को जनता ने अच्छी तरह से नहीं समझा है, इसलिए शरद पवार की चाहत यह है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार अपना पांच वर्ष कार्यकाल पूरा करे, ताकि शरद पवार तथा उद्धव ठाकरे इस रुप में जनता के सामने आ सके कि ये दोनों नेता संकट के समय सामने आकर सरकार बना सकें तथा राजनीतिक गतिरोध को दूर कर सकें।
राज्य की राजनीति पहले मुख्य रूप से कांग्रेस-राकां-शिवसेना-भाजपा इन चारों राजनीतिक दलों के इर्द-गिर्द घूमा करती थी, आज भी राज्य की राजनीतिक के मुख्य दलों में शिवसेना-राकां-कांग्रेस तथा भाजपा ही शामिल है, जिस दल को राज्य की जनता ने सबसे बड़े दल के रूप में सामने लाया था, उस भाजपा को सत्ता के बाहर बैठना पड़ा और दूसरे-तीसरे तथा चौथे यानि शिवसेना-राकांपा तथा कांग्रेस ने मिलकर राज्य में अपनी सरकार बना ली और यह सरकार अगले माह नवंबर में अपने दो साल पूरे कर रही है।
राज्य की महाविकास आघाडी के महानायक शरद पवार की चाहत है कि जिस सरकार के गठन के लिए उन्होंने एडी चोटी का जोर लगाया, वह सरकार अपना कार्यकाल पूरा करे, इसीलिए जब भी कोई राज्य की महाविकास सरकार को अस्थिर करने की कोशिश करता है तो शरद पवार उसे अपनी चाणक्यीय चाल से फेल करने की कोशिश करते हैं और अपने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए उन्हें आगाह करते हुए कहते हैं कि चाहे जितना जोर लगा लो, लेकिन राज्य की महाविकास आघाडी की सरकार की स्थिरता पर जरा भी फर्क नहीं पड़ेगा और राज्य में अगले विधानसभा चुनाव तय समय पर ही यानि 2024 में ही होंगे और उससे पहले उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास आघाडी की सरकार गिराने का सपना देखने वालों का सपना कभी पूरा नहीं होगा।                              

—दैनिक हाक फीचर्स