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यह विस्तार है या संवेदना का प्रतिफल

 
delkar

सुधीर जोशी*
देश के 29 विधानसभा तथा 3 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में हुए उपचुनाव के परिणाम जहां एक ओर भाजपा के लिए गहन मंथन कराने वाले हैं तो वहीं दूसरी ओर दादरा नगर हवेली लोकसभा में शिवसेना को मिली जीत के बाद राजनीतिक गलियारे में यह चर्चा होने लगी है क्या यह विजय शिवसेना के राष्ट्रव्यापी विस्तार की ओर बढ़ता एक सशक्त कदम है, या फिर शिवेसना की ओर से चुनाव जीतने का एक संवेदनात्मक रणनीति का एक हिस्सा मात्र है। विधानसभा तथा लोकसभा के नज़रिए से देखा जाए तो आज की तारीख में शिवसेना की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है, कहा तो यहां तक जाने लगा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में शिवसेना को 50 सीटें भी नहीं मिल पाएंगी। विगत विधानसभा चुनाव में शिवसेना को 56 सीटें ही मिली थीं, जबकि भाजपा की झोली में 105 सीटें आयी थीं। 2019 के चुनावी जंग में एक साथ मिलकर उतरी भाजपा-शिवसेना गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद जब सभी यह मानकर चल रहे थे कि राज्य में एक बार फिर भाजपा-शिवसेना की सरकार बनेगी, तभी शिवसेना प्रमुख ने यह जिद्द ठान ली कि मुख्यमंत्री शिवसेना का ही बनेगा, शिवेसना की यह मांग भाजपा को स्वीकार नहीं थी और भाजपा ने विपक्ष में बैठने का ऐलान कर दिया।
 शिवसेना ने मुख्यमंत्री पद पाने की जिद्द में अपने वर्षाे पुराने राजनीतिक मित्र पक्ष भाजपा से रिश्ता तोड़कर उन दलों के साथ मिलकर राज्य में सत्ता स्थापित की, जिनकी विचारधारा कभी शिवसेना से मेल नहीं खाती। भगवाई राजनीति तथा प्रखर हिंदुत्ववादी राजनीतिक दल के रूप में जिस शिवसेना की छवि थी, उस छवि पर राकांपा तथा कांग्रेस से साथ मिलकर महाविकास आघाडी के बैनर तले शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में राज्य में तीन दिलों की खिचड़ी सरकार बनने के बाद से न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश में शिवसेना की जबर्दस्त आलोचना हुई, लेकिन इन सभी आलोचनाओं के बीच दादरा नगर हवेली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के लिए हुए उपचुनाव में शिवसेना उम्मीदवार के रूप में उतरीं कला बेन डेलकर को मिली भारी जीत से शिवसेना का मनोबल बहुत ज्यादा बढ़ गया है. कला बेन ने भाजपा उम्मीदवार महेश गावित को 51 हजार, 269 मतों से पराजित किया।  
शिवसेना ने स्वयं पर लगे क्षेत्रीय दल के तमगे को हटाने के लिए कई बार उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा तथा बिहार जैसे राज्यों के कुछ लोकसभा तथा विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए लेकिन हर बार शिवसेना को पराजय का ही मुह देखना पड़ा, लेकिन दिवंगत सांसद मोहन डेलकर की पत्नी कलाबेन डेलकर ने दादरा नगर हवेली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के लड़े गए उपचुनाव जीत कर शिवसेना महाराष्ट्र के बाहर चुनाव नहीं जीत सकती, इस मिथक को तोड़ दिया है। कला बेन डेलकर द्वारा दादरा नगर हवेली लोकसभा उपचुनाव जीतने के बाद महाराष्ट्र से शिवेसना सांसदों की संख्या 19 हो गई है। राज्य सभा सांसद संजय राऊत ने कला बेन डेलकर को शिवसेना में लाने में अहम भूमिका अदा की है।
कला बेन के पति तथा लंबे समय तक दादरा नगर हवेली के सांसद रहे मोहन डेलकर तथा शिवसेना सांसद संजय राऊत के बीच एक परिवार जैसा रिश्ता है। मोहन डेलकर ने मुंबई में आत्महत्या की थी। अपने सोसाइट नोट में मोहन डेलकर ने भाजपा के दादरा नगर हवेली के भाजपा नेताओं पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। दादरा नगर हवेली उपचुनाव में शिवसेना ने एक राजनीतिक जंग के तौर पर मोहन डेलकर की पत्नी कला बेन डेलकर को उतारकर आधी जीत तो नामांकन पत्र दाखिले के साथ ही जीत ली थी और बाकी की कसर चुनाव प्रचार के दौरान डेलकर परिवार के प्रति उमड़ी संवेदनाओं ने पूरा कर दिया। कला बेन डेलकर भाजपा की ओर से चुनावी जंग में उतरें, इसे लेकर जबर्दस्त लामबंदी हुई, कुछ डेलकर समर्थक इस पक्ष में थे कि कला बेन डेलकर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी जंग में उतरें, फिर क्या था लंबी खींचतान के बाद शिवसेना ने कला बेन डेलकर को दादरा नगर हवेली से लोकसभा उपचुनाव के लिए मैदान में उतारा और कला बेन डेलकर ने अपने पति की मौत के कारण उमडी संवेदना और मोहन डेलकर की एक अच्छे नेता के रूप में सामने आई छवि का पूरा फायदा प्राप्त कर दादरा नगर हवेली लोकसभा के उपचुनाव में भारी जीत अर्जित की।
चूंकि मोहन डेलकर ने अपने सोसाइट नोट में इस बात का उल्लेख किया था कि भाजपा के दादरा नगर हवेली के स्थानीय नेताओं ने उन्हें बहुत परेशान कर रखा था। बताया जाता रहा था कि मोहन डेलकर खुद को बहुत अकेला महसूस करने लगे थे, उन्हें दादरा नगर हवेली के भाजपा नेताओं का साथ नहीं मिल रहा था, इसलिए मोहन डेलकर मुंबई में आत्महत्या कर ली। दादरा नगर हवेली के लोकसभा उपचुनाव में जीत दर्ज कर कला बेन डेलकर ने दो निशाने साधे हैं, पहला यह कि कला बेन ने यह जीत दर्ज कर अपने राजनीतिक करियर की एक मजबूत शुरूआत की और दूसरा निशाना यह है कि शिवसेना को महाराष्ट्र से बाहर ले जाने का श्रेय प्राप्त करने वाली वे पहली नेता बन गई हैं। भाजपा की ओर से दादरा नगर हवेली की सीट जीतने की पूरी कोशिश की गई। भाजपा ने दादरा नगर हवेली लोकसभा उपचुनाव को अपनी प्रतिष्ठा का विषय बना लिया था, इसलिए भाजपा की ओर से गुजरात तथा महाराष्ट्र के कई दिग्गजों को प्रचार के लिए उतारा था। 
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्त्म रुपाला, अश्विनी वैष्णव, डा भारती पवार को दादरा नगर हवेली के चुनावी जंग में प्रचार के लिए उतारा था, लेकिन भाजपा के ये सभी दिग्गज नेता भी भाजपा को दादरा नगर हवेली की सीट नहीं दिलवा पाए। भाजपा ने इन सभी दिग्गजों का जोरदार प्रचार भी डेलकर की मिली सहानुभूति की लहर को कम नहीं कर पाया और कला बेन डेलकर ने चुनाव जीत कर भाजपा के दिग्गज नेताओं की कड़ी मेहनत पर पानी फेर दिया। सात बार दादरा नगर हवेली से सांसद निर्वाचित हुए मोहन डेलकर क्षेत्र के सबसे लोकप्रिय नेताओं में शुमार रहे हैं। निर्दलीय, भाजपा तथा कांग्रेस की ओर से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए मोहन भाई डेलकर के पिता सांझी भाई डेलकर  1967 में दादरा नगर हवेली लोकसभा सीट के लिए निर्वाचित हुए थे। दादरा नगर हवेली के लिए डेलकर परिवार का महत्व बिल्कुल वैसा ही है, जैसा महाराष्ट्र के लिए ठाकरे परिवार का है।
दादरा नगर  हवेली में डेलकर परिवार के दबदबे का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सन् 1998 में लोकसभा चुनावी जंग में उतरे मोहन डेलकर के विरोध में  शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे की सभा आयोजन किया गया था। बावजूद इसके शिवसेना उम्मीदवार को जीत हासिल नहीं हुई थी। वर्तमान में भी डेलकर परिवार का दबदबा दादरा नगर हवेली में कितना है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गुजरात तथा महाराष्ट्र के कई दिग्गज नेता मिलकर भी मोहन डेलकर की पत्नी तथा सांझी भाई डेलकर  की बहु कला बेन डेलकर को नहीं हरा सके। 
दादरा नगर हवेली में कला बेन की ताकत भाजपा तथा शिवसेना दोनों के मुकाबले बहुत ज्यादा है, इसलिए दादरा नगर हवेली में कला बेन की जीत डेलकर का परिवार का दबदबा तथा मोहन डेलकर की मौत के बाद उनकी पत्नी कला बेन के प्रति उमड़ी संवेदना का ही  प्रतिफल है, इसलिए दादरा नगर हवेली में कला बेन डेलकर की जीत को शिवसेना अपने राष्ट्रीय विस्तार के रूप में देखने की भूल न करे, क्योंकि डेलकर परिवार दादरा नगर हवेली की भूमि का परिवार है, इस परिवार के लोग कैसे हैं, उन्होंने क्षेत्र के विस्तार के लिए क्या किया है, यह बताने की जरूरत नहीं है। कुल मिलाकर दादरा नगर हवेली लोकसभा उपचुनाव में शिवसेना को मिली जीत शिवसेना के करिश्मे की जीत न होकर इस क्षेत्र डेलकर परिवार के दबदबे की जीत है, अगर ऐसा कहा जाए तो इसमें कुछ गलत नहीं होगा।                          

—दैनिक हाक
*द्वारा डा. हेमंत जोशी, बाल रोग चिकित्सक, विरार पूर्व, जिला- पालघर (महाराष्ट्र)