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प्रधानमंत्री ने आदि शंकराचार्य समाधि का उद्घाटन किया व उनकी प्रतिमा का अनावरण किया

प्रधानमंत्री ने केदारनाथ में विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी और राष्ट्र को समर्पित किया

देशभर में चार धाम सहित सभी ज्योतिर्लिंगों और ज्योतिषपीठों में कार्यक्रम आयोजित किए गए

केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी केरल के कलादी में एक विशेष कार्यक्रम में शामिल हुए

आदि शंकराचार्य के अद्वैत की मूल शिक्षाएं समावेश, समानता, ज्ञान की खोज और वाद-विवाद, चर्चा के अनुकूल वातावरण को बढ़ावा देती हैं : जी. किशन रेड्डी

 
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p2नई दिल्ली (दैनिक हाक): प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने केदारनाथ में विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी और राष्ट्र को समर्पित किया। उन्होंने आदि शंकराचार्य समाधि का उद्घाटन किया और आदि शंकराचार्य की प्रतिमा का अनावरण किया। उन्होंने वहां पूरे हुए और चल रहे बुनियादी कार्यों की समीक्षा की और निरीक्षण किया। प्रधानमंत्री ने केदारनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की।

केदारनाथ धाम के साथ-साथ पूरे देश में 12 ज्योतिर्लिंगों और 4 धामों और कई अन्य धार्मिक स्थलों पर पूजा-अर्चना की गई और समारोह आयोजित किए गए। सभी कार्यक्रम केदारनाथ धाम के मुख्य कार्यक्रम से जुड़े हुए थे।

संस्कृति, पर्यटन और पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास (डोनर) मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी आज केरल के कलादी में आदि शंकराचार्य मंदिर पहुंचे और केदारनाथ में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से हिस्सा लिया, जिसमें आदि शंकराचार्य की प्रतिमा का अनावरण भी शामिल था। कलादी आदि शंकराचार्य की जन्मस्थली है।

प्रधानमंत्री द्वारा विभिन्न परियोजनाओं के उद्घाटन से पहले, केंद्रीय मंत्री ने कलादी में सभा को संबोधित किया और आदि शंकराचार्य के महत्वपूर्ण योगदान की चर्चा की।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आदिशंकर के अद्वैत की मूल शिक्षाएं समावेश, समानता, ज्ञान की खोज और वाद-विवाद, चर्चा, विचार-विमर्श के वातावरण को बढ़ावा देती हैं।

आदि शंकराचार्य जातिगत भेदभाव के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले भारत के शुरुआती समाज सुधारकों में से एक थे।

उन्होंने आगे कहा कि हमारे समाज में सीखने और स्वस्थ चर्चा की संस्कृति को शंकराचार्य ने आगे बढ़ाया, विशेष रूप से हमारे युवाओं में और अब भारत की आजादी के 100 साल पूरे होने पर 2047 के लिए ऐसा मार्ग प्रशस्त होना चाहिए जिससे देश को विश्वगुरु बनाया जा सके।

modiकेंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि शंकराचार्य अपने जीवन के अनुभवों और चांडाल जैसे व्यक्तियों के साथ वाद-विवाद से प्रेरित थे। मंत्री ने समझाया कि इन सबने शंकराचार्य को समानता और एकता की भावना के लिए प्रेरित किया और उन्हें जातिगत भेदभाव से लड़ने वाले शुरुआती समाज सुधारकों में से एक बना दिया।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'जगद्गुरु एक ही छत के नीचे हिंदू धर्म की विभिन्न प्रथाओं को साथ लाए और भारत के चार कोनों में 4 पीठों को आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित किया। 12 ज्योतिर्लिंग जिनमें केदारनाथ भी शामिल है, ये शंकराचार्य की शिक्षाओं की व्यापक पहुंच का प्रमाण हैं।'

उन्होंने कहा कि हमारी विरासत और संस्कृति को सभी भारतीयों तक पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री ने हमेशा कड़ी मेहनत की है। केदारनाथ में प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन न केवल तीर्थयात्रियों की पहुंच में सुधार करता है बल्कि प्राकृतिक आपदाओं से भी सुरक्षा प्रदान करता है। जिन कार्यों को पूरा किया गया है उनमें सरस्वती रिटेनिंग वाल (पानी आदि रोकने के लिए बनाई गई दीवार), मंदाकिनी रिटेनिंग वाल और मंदाकिनी नदी पर गरुड़ चट्टी पुल का निर्माण शामिल है।

‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तहत हमारी आजादी के 75वें वर्ष के मौके पर जन भागीदारी वाले कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, आदि शंकराचार्य के अद्वितीय ज्ञान और समृद्ध विचारों ने हमारे समाज पर एक अमिट छाप छोड़ी है।

समारोह के बाद केंद्रीय संस्कृति, पर्यटन और डोनर मंत्री ने पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय के तहत विभिन्न कार्यालयों की समीक्षा भी की। इसमें केरल में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) का त्रिशूर सर्कल, दक्षिण क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एसजेडसीसी), इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) त्रिशूर और पर्यटन मंत्रालय के क्षेत्रीय निदेशालय शामिल थे। केरल सरकार के अधीन केरल पर्यटन विकास निगम (केटीडीसी) के सदस्य भी उपस्थित थे।

 
शाम में, केंद्रीय मंत्री ने एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया जिसमें संगीत विभाग, श्री शंकराचार्य संस्कृति विश्वविद्यालय कलादी के सदस्यों और छात्रों द्वारा आदि शंकराचार्य की कई लोकप्रिय रचनाओं का पाठ किया गया।
 
11 ज्योतिर्लिंग, 4 ज्योतिष पीठ और चार धाम (बद्रीनाथ, द्वारका, पुरी और रामेश्वरम) में भी एक साथ कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रमों में परंपरा के अनुसार सुबह की आरती और उसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार शामिल थे। संस्कृति मंत्रालय ने ज्योतिर्लिंगों/ज्योतिष पीठ के परिसर या आसपास सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया।